Bihar News: बिहार का अनोखा घर, हर रोज 62 किलो आटे की बनती है रोटी,घर से सड़क तक कराया जाता है रोजाना सामूहिक भोजन

Bihar News: बिहार के गया ज़िले की पवित्र धरती बोधगया जहाँ दुनिया भर से लोग शांति, ध्यान और मोक्ष की तलाश में आते हैं वहीं इन दिनों एक नाम ख़ामोशी से मशहूर हो चुका है।

इस घर में हर रोज 62 किलो आटे की बनती है रोटी- फोटो : social Media

Bihar News: बिहार के गया ज़िले की पवित्र धरती बोधगया जहाँ दुनिया भर से लोग शांति, ध्यान और मोक्ष की तलाश में आते हैं वहीं इन दिनों एक नाम ख़ामोशी से मशहूर हो चुका है। यह नाम है बौद्ध भिक्षुणी आनी ज्ञान लामो, जो इंसानों के नहीं, बल्कि बेज़ुबान जानवरों की मसीहा बन चुकी हैं। जब आनी सड़क पर निकलती हैं, तो उनके साथ कुत्तों का झुंड चलता है—जैसे माँ के पीछे उसके अपने बच्चे।

इन स्ट्रीट डॉग्स के दर्द को जब किसी ने महसूस नहीं किया, तब आनी भगवान की तरह उनके जीवन में उतरीं। छोटे बच्चों की तरह आनी हर कुत्ते का ख़याल रखती हैंसमय पर खाना, दूध, दवा और बेपनाह मोहब्बत। आनी की “शू-शू” की आवाज़ सुनते ही कुत्ते भौंकते, दौड़ते और खुशी से उछलते हुए कुछ ही पलों में उनके चारों ओर जमा हो जाते हैं। बिना कुछ बोले, ये बेज़ुबान अपनी हर हरकत से आनी को तहे-दिल शुक्रिया अदा करते हैं।

55 वर्षीय तिब्बती महिला आनी मूल रूप से खंबा चम्हदू की रहने वाली हैं। माता-पिता के देहांत के बाद वे भारत लौटीं और अब अपनी पूरी संपत्ति सेवा के रास्ते में लुटा रही हैं। आनी रोज़ अपने रसोईघर में करीब 62 किलो आटे की रोटियाँ बनवाती हैं और 35 लीटर दूध बोधगया के कुत्तों के लिए मंगवाती हैं। हर महीने करीब दो लाख रुपये का खर्च सिर्फ इसलिए कि कोई बेज़ुबान भूखा न सोए।

इस सेवा की शुरुआत एक दर्दनाक मंज़र से हुई। साल 2020 से पहले, एक घायल पप्पी को सड़क पर तड़पते और उसकी माँ को बेचैन देख आनी का दिल पिघल गया। उसी दिन उन्होंने डर को मोहब्बत में बदल दिया। आज वही आनी कुत्तों को गोद में उठाती हैं, नाम से बुलाती हैं, प्यार करती हैं और एक आवाज़ में उन्हें बैठा देती हैं।

शुरुआत में लोगों ने ताने मारे, बदज़बानी की, मगर आनी कहती हैं भगवान देख रहा है मेरी नीयत। अब हालात बदल रहे हैं। कोई आटा देता है, कोई दूध, कोई दुआ। विदेशी सैलानी भी मदद करते हैं। आनी किसी संस्था के नाम पर नहीं, सिर्फ इंसानियत के नाम पर सेवा करती हैं।बोधगया की गलियों में आज करुणा चलती है एक भिक्षुणी के क़दमों के साथ, और उसके पीछे चलते बेज़ुबान, जिन्हें आखिरकार एक माँ मिल गई है।