Pitrupaksh Mela 2026 : गयाजी में ऑनलाइन पिंडदान और टूरिज्म पैकेज पर गहराया विवाद, पंडा समाज ने जताई कड़ी आपत्ति

Pitrupaksh Mela 2026 : गया में पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले ऑनलाइन पिंडदान और पिंडदान के नाम पर चलाए जा रहे टूरिज्म पैकेज को लेकर विवाद तेज हो गया है.......पढ़िए आगे

टूरिज्म पैकेज का विरोध - फोटो : MANOJ

GAYAJI : बिहार के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गयाजी में विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू होने से ठीक पहले ऑनलाइन पिंडदान और निजी टूरिज्म पैकेजों को लेकर विवाद गहरा गया है। गयापाल समाज और 14 सैया गयापाल समिति ने बुधवार को ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर परिसर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन कर इन प्रक्रियाओं का जोरदार विरोध जताया। पंडा समाज ने साफ शब्दों में कहा कि सनातन परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रेस वार्ता के दौरान पंडा समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि गयाजी में पिंडदान पूरी तरह से सनातन परंपरा, वेदोक्त नियमों और शास्त्रीय विधि से संपन्न होता है। शास्त्रों के अनुसार इस पावन भूमि पर होने वाले कर्मकांड में श्रद्धालु की स्वयं भौतिक मौजूदगी अनिवार्य और सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इंटरनेट या किसी डिजिटल माध्यम के जरिए घर बैठे ऑनलाइन पिंडदान की प्रक्रिया को धार्मिक नियमों के पूरी तरह विपरीत बताया गया है।

गयापाल समाज ने बाजार में 25 हजार से लेकर 51 हजार रुपये तक में बेचे जा रहे कथित 'पिंडदान टूरिज्म पैकेजों' पर भी कड़े सवाल खड़े किए। समाज के प्रमुखों ने कहा कि मोक्षदायिनी भूमि पर किए जाने वाले धार्मिक कर्मकांड को किसी भी सूरत में व्यावसायिक कारोबार या टूरिज्म पैकेज का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि कुछ निजी एजेंसियां और बिचौलिए धर्म के नाम पर श्रद्धालुओं की आस्था का व्यवसायीकरण कर रहे हैं।

पंडा समाज ने देश-विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ऑनलाइन पिंडदान, सोशल मीडिया के विज्ञापनों और निजी एजेंसियों द्वारा दिए जा रहे आकर्षक पैकेजों के नाम पर होने वाली ठगी से पूरी तरह सावधान रहें। उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी कि वे गयाजी आकर पूरी निष्ठा और वैदिक रीति-रिवाज से ही अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण संपन्न कराएं ताकि उनकी आत्मा को सद्गति मिल सके।

विष्णुपद मंदिर से चेतावनी देते हुए पंडा समाज ने कहा कि अगर इन अवैध ऑनलाइन व्यवस्थाओं और कमर्शियल पैकेजों पर प्रशासन द्वारा जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो वे इस परंपरा की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ने पर इस धोखाधड़ी और धार्मिक खिलवाड़ के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

मनोज की रिपोर्ट