Bihar News: ढाढ़र सिंचाई परियोजना से खुल गई किसानों की किस्मत, 300 करोड़ की परियोजना ने बदली गया, नवादा ,जहानाबाद की तस्वीर, होने लगी लाखों का आमदनी

Bihar News: कभी सूखे और पानी की किल्लत से जूझने वाले इलाके में अब खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच रहा है, जिससे....

ढाढ़र सिंचाई परियोजना से खुल गई किसानों की किस्मत- फोटो : reporter

Bihar News: कभी सूखे और पानी की किल्लत से जूझने वाले इलाके में अब खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच रहा है, जिससे किसानों की परेशानी काफी हद तक दूर हो गई है। गया जिले में स्थित ढाढ़र सिंचाई परियोजना आज लाखों किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। गया के फतेहपुर प्रखंड के सोहजना दोनैया में बने बैराज के जरिए गया, नवादा और जहानाबाद जिलों के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। हालांकि इसकी कहानी कई दशक पुरानी है। इस परियोजना की परिकल्पना 1960 और 1970 के दशक में शुरू हुई थी, जब क्षेत्र में बार-बार पड़ने वाले सूखे ने किसानों की जिंदगी को प्रभावित कर दिया था। जानकारों के अनुसार वर्ष 1964 में तत्कालीन सांसद सत्यभामा देवी की पहल पर तिलैया-ढाढ़र सिंचाई परियोजना का खाका तैयार किया गया था। बाद में केंद्रीय मंत्री के.एन. राव के समक्ष इसका प्रस्ताव रखा गया और वर्ष 1974 में परियोजना को अंतिम रूप मिला। वर्ष 1984 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह ने फतेहपुर के सोहजना दोनैया में परियोजना का शिलान्यास किया था।

ढाढ़र नदी पर बने 138 मीटर लंबे बैराज के माध्यम से तिलैया जलाशय से पानी लाने की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना का उद्देश्य गया और नवादा जिले के करीब 31,700 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था। वर्तमान में ढाढ़र नदी से उपलब्ध जल के जरिए मुख्य नहर और उसकी शाखाओं से लगभग 6,900 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की सिंचाई की जा रही है। हालांकि वर्ष 2000 में बिहार और झारखंड के विभाजन के बाद यह परियोजना गंभीर संकट में फंस गई थी। तिलैया जलाशय झारखंड में चला गया और वहां से पानी मिलने में बाधाएं खड़ी हो गईं। इसके कारण परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और किसानों ने आंदोलन चलाए। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा और बाद में इसे नौवीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया।

विभागीय सूत्रों के अनुसार खरीफ मौसम में सोहजना दोनैया बैराज से लगभग 739 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, जो नहरों और उनकी शाखाओं के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंचता है। इससे धान समेत अन्य खरीफ फसलों की खेती को बड़ा लाभ मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तिलैया जलाशय से अतिरिक्त जल उपलब्ध हो जाए तो शेष 24,800 हेक्टेयर क्षेत्र में भी सिंचाई सुविधा बहाल की जा सकती है। इसके अलावा परियोजना से भविष्य में 60 मेगावाट बिजली उत्पादन की भी योजना है।

ढाढ़र सिंचाई परियोजना केवल एक सिंचाई योजना नहीं, बल्कि दशकों के संघर्ष, किसानों की उम्मीदों और क्षेत्रीय विकास की एक बड़ी कहानी बन चुकी है। आज यह परियोजना गया, नवादा और जहानाबाद के लाखों किसानों के लिए खेती की नई उम्मीद और समृद्धि का आधार बन रही है।