Bihar doctor degree controversy:डॉ. टीके शर्मा की डिग्री पर उठे गंभीर सवाल, IMA ने सदस्यता की अस्थायी निलंबित, राज्य संघ करेगा दस्तावेजों की जांच

Bihar doctor degree controversy: गया के चिकित्सक डॉ. टीके शर्मा की शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल अब राज्य स्तर तक पहुंच गए हैं। प्रकरण में भारतीय चिकित्सा संघ , गया ने डॉ. टीके शर्मा की सदस्यता को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।

डॉ. टीके शर्मा की IMA ने सदस्यता की अस्थायी निलंबित- फोटो : reporter

Bihar doctor degree controversy: गया के चिकित्सक डॉ. टीके शर्मा की शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल अब राज्य स्तर तक पहुंच गए हैं। प्रकरण में भारतीय चिकित्सा संघ , गया ने डॉ. टीके शर्मा की सदस्यता को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। साथ ही दस्तावेजों की जांच और आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए पूरा मामला बिहार राज्य चिकित्सा संघ, पटना को भेजा गया है। इस घटनाक्रम के बाद चिकित्सा जगत में भी मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मामला तब गरमाया जब डॉ. टीके शर्मा की ओर से भारतीय चिकित्सा संघ गया को प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद भारतीय चिकित्सा संघगया ने उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित जांच प्रतिवेदन को अपने संज्ञान में लिया। भारतीय चिकित्सा संघगया के सचिव डॉ. विमलेन्दु विमल ने बिहार राज्य चिकित्सा संघ के सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का अवलोकन किया गया। पत्र में दस्तावेजों को जांच के बाद संदेहास्पद बताए जाने का उल्लेख है।

इसके बाद मामले की पूरी संचिका राज्य संघ को भेजते हुए दोनों पक्षों के दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है। अब इस प्रकरण में अगली निगाह बिहार राज्य चिकित्सा संघ, पटना की कार्रवाई पर टिकी है।

बताया जाता है कि अर्श हॉस्पिटल की एमडी कविता निश्चल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. टीके शर्मा की शैक्षणिक डिग्री और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद विवाद भारतीय चिकित्सा संघ गया तक पहुंचा। भारतीय चिकित्सा संघ स्तर पर हुई प्रक्रिया के बाद अब मामला राज्य स्तरीय जांच के लिए अग्रसारित किया गया है।

विवाद का एक अहम पहलू डॉ. टीके शर्मा के दस्तावेजों और आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को लेकर भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आधार कार्ड में उनका जन्म वर्ष 1985 दर्ज बताया गया है, जबकि कुछ शैक्षणिक दस्तावेजों में जन्म वर्ष 1986 का उल्लेख होने का दावा किया गया है। जन्मतिथि में एक वर्ष के इस कथित अंतर को लेकर भी दस्तावेजों पर सवाल उठ रहे हैं।

 फिलहाल IMA गया की अस्थायी कार्रवाई और राज्य संघ को भेजी गई संचिका ने पूरे प्रकरण को गंभीर बना दिया है। चिकित्सकीय पेशे में शैक्षणिक योग्यता और प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे में राज्य स्तरीय जांच में दोनों पक्षों के दस्तावेजों का सत्यापन, संबंधित संस्थानों से रिकॉर्ड की पुष्टि और जांच प्रतिवेदन का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा। 

रिपोर्ट- प्रेमशंकर