Bihar Fake Doctor:फर्जी डिग्री का डॉक्टर? करोड़ों के वेतन, जाली सर्टिफिकेट और साज़िश के आरोपों से गया में मचा हड़कंप, क्या कर रहा प्रशासन?

Bihar Fake Doctor: बिहार के गया जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति और डिग्रियों की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फर्जी डिग्री का डॉक्टर?- फोटो : reporter

Bihar Fake Doctor: बिहार के गया जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने निजी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति और डिग्रियों की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के अर्श सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने अपने पूर्व चिकित्सक डॉ. टिकेन्द्र शर्मा के खिलाफ रामपुर थाने में संगीन आरोपों के साथ प्राथमिकी दर्ज कराने की शिकायत दी है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि डॉक्टर ने कथित तौर पर जाली डिग्रियों और संदिग्ध दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल की, लाखों रुपये वेतन लिया और बाद में अस्पताल की साख को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, टिकेन्द्र शर्मा वर्ष 2022 में खुद को एमबीबीएस, एमडी (जनरल मेडिसिन), डिप्लोमा इन गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एफआरएसपीएच, एमएससी, पीएचडी और एमबीए जैसी कई डिग्रियों से लैस अनुभवी चिकित्सक बताकर प्रबंधन का भरोसा जीतने में सफल रहे। इसके बाद उन्हें गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में नियुक्त किया गया और बाद में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। आरोप है कि जून 2022 से अप्रैल 2026 तक उन्हें हर महीने 2.25 लाख रुपये वेतन दिया जाता रहा, जबकि उनकी पत्नी के खाते में अलग से इंसेंटिव की राशि भी भेजी जाती रही।

मामले में सबसे बड़ा राज़ तब खुला, जब अस्पताल ने उनके दस्तावेजों की दोबारा पड़ताल कराई। शिकायत के अनुसार, दिल्ली मेडिकल काउंसिल में जमा दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि 26 नवंबर 1986 दर्ज है, जबकि आधार कार्ड और पैन कार्ड में नाम और जन्मतिथि 11 नवंबर 1985 बताई गई है। अस्पताल का आरोप है कि सरकारी दस्तावेजों में इस तरह का अंतर पूरी कहानी को संदिग्ध बना देता है।

प्रबंधन का यह भी दावा है कि टिकेन्द्र शर्मा ने विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल करने का जो दावा किया, उसमें भी कई पेचीदगियां सामने आईं। शिकायत के अनुसार, उन्होंने दिल्ली मेडिकल काउंसिल के समक्ष वर्ष 2023 में विदेश स्थित मेडिकल संस्थान से एमडी (फिजिशियन) की डिग्री प्राप्त करने का उल्लेख किया। जबकि अस्पताल का कहना है कि वह वर्ष 2021 से ही खुद को एमबीबीएस और विशेषज्ञ चिकित्सक बताकर विभिन्न अस्पतालों में सेवाएं दे रहे थे। प्रबंधन का आरोप है कि यदि विदेशी डिग्री 2023 में हासिल की गई, तो उससे पहले भारत में चिकित्सकीय सेवा देने का दावा नियमों के अनुरूप नहीं दिखता। अस्पताल ने यह भी कहा कि विदेशी मेडिकल डिग्रीधारकों के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठते हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सेवा के दौरान डॉक्टर के खिलाफ मरीजों से दवा और इलाज को लेकर लगातार शिकायतें आती रहीं। इतना ही नहीं, अस्पताल का कहना है कि उन्होंने प्रबंधन की अनुमति के बिना निजी प्रचार-प्रसार और मार्केटिंग गतिविधियां भी चलाईं, जो अस्पताल की एचआर नीति और प्रोफेशनल एथिक्स के खिलाफ था। कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 16 मई 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

अस्पताल प्रबंधन का आरोप यहीं नहीं रुका। शिकायत में कहा गया है कि सेवामुक्ति के बाद टिकेन्द्र शर्मा ने कथित तौर पर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अस्पताल की छवि धूमिल करने की कोशिश की। साथ ही एक स्थानीय यूट्यूबर कुनाल कुमार और अन्य सहयोगियों पर भी कथित साज़िश रचकर अस्पताल के खिलाफ भ्रामक सामग्री प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जब वायरल सामग्री का आधार पूछा गया तो कथित तौर पर मोटी रकम की मांग की गई। 

अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस से मांग की है कि कथित फर्जी डिग्रियों, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने, वेतन लेने और सोशल मीडिया के जरिए अस्पताल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि टिकेन्द्र शर्मा और उनकी पत्नी को वेतन व इंसेंटिव के रूप में मिली करीब 1.10 करोड़ रुपये की राशि की वसूली भी की जानी चाहिए। आरोप गंभीर हैं वहीं, डॉ. टिकेन्द्र शर्मा, यूट्यूबर कुनाल कुमार या अन्य आरोपित पक्षों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस पूरे प्रकरण की जांच के बाद डॉ टिकेंद्र से संबंधित और भी बड़े खुलासे की उम्मीद की जा रही है....