गोपालगंज की 'साहसी बेटी का ऐसा जुनून! बिहार की इस छात्रा के स्कूल जाने के संघर्ष ने इंटरनेट को रुलाया
बिहार के गोपालगंज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इसमें एक दिव्यांग लड़की रोज़ 2 किमी चलकर स्कूल जाती है.जिसके बाद इंटरनेट पर चर्चा तेज हो गई है.बच्ची के पिता नहीं हैं और माँ मजदूरी करती है।
बिहार के गोपालगंज जिले के रामनगर गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक दिव्यांग छात्रा के स्कूल जाने के कड़े संघर्ष को दिखाया गया है। जानकारी के अनुसार, इस छात्रा के पिता का देहांत हो चुका है और उसकी मां मजदूरी कर घर चलाती हैं। आर्थिक तंगी और शारीरिक लाचारी के बावजूद, यह छात्रा रोज लगभग 2 किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूल पहुंचती है। इस वीडियो ने हजारों लोगों का दिल जीत लिया है और लोग इस बच्ची के जज्बे को सलाम कर रहे हैं।
वीडियो के वायरल होते ही वहीं दूसरी ओर कवि कुमार विश्वास ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, क्या कोई इस बिटिया के परिवार के किसी व्यक्ति का नंबर दिला सकता है जिसके माध्यम से बिटिया को सुविधा सुलभ कराई जा सके? वही मशहूर लोक गायिका और बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने इस पर संज्ञान लिया। उन्होंने छात्रा की हिम्मत की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर उसका नाम, पता और संपर्क नंबर मांगा है ताकि वे व्यक्तिगत रूप से मदद पहुंचा सकें। मैथिली की इस दरियादिली की जहां उनके प्रशंसक तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करते हुए उनकी तुलना सोनू सूद से की है। हालांकि, सकारात्मक प्रतिक्रियाओं का पलड़ा भारी है और लोग इसे एक कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देख रहे हैं।
सरकारी योजनाओं और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस वीडियो के सामने आने के बाद गोपालगंज जिला प्रशासन और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जब सरकार दिव्यांगों के लिए ट्राई-साइकिल और अन्य सहायक उपकरण देने का दावा करती है, तो इस जरूरतमंद छात्रा तक अब तक मदद क्यों नहीं पहुंची? कई लोगों ने कमेंट करते हुए मांग की है कि प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर इस बच्ची को इलेक्ट्रिक साइकिल मुहैया करानी चाहिए ताकि उसकी शिक्षा की राह आसान हो सके।
शिक्षा के प्रति जुनून और समाज के लिए मिसाल
तमाम सुख-सुविधाओं के बावजूद पढ़ाई से जी चुराने वाले बच्चों के लिए यह छात्रा एक बड़ी मिसाल बनकर उभरी है। विपरीत परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव में भी उसका स्कूल जाना यह दर्शाता है कि शिक्षा के प्रति अटूट विश्वास किसी भी शारीरिक बाधा से बड़ा होता है। हालांकि, इस खबर की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन इंटरनेट पर मिल रहे समर्थन ने यह साफ कर दिया है कि समाज ऐसी प्रतिभाओं की मदद के लिए एकजुट है। उम्मीद की जा रही है कि मैथिली ठाकुर या प्रशासन के जरिए जल्द ही इस छात्रा तक आवश्यक सहायता पहुंच जाएगी।