Katihar Flood:गंगा का कहर, घर डूबे तो रेलवे ट्रैक किनारे बसा आशियाना, हर ट्रेन के साथ थमतीं हैं सांसें
Katihar Flood: गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के बाद कटिहार के मनिहारी इलाके में बाढ़ की मुश्किलें और गहरा गई हैं।...
Katihar Flood: गंगा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के बाद कटिहार के मनिहारी इलाके में बाढ़ की मुश्किलें और गहरा गई हैं। कई लोगों के घर पानी में डूब जाने के बाद बाढ़ पीड़ित रेलवे पटरियों के किनारे शरण लेने को मजबूर हैं। सिर पर छत नहीं और सामने से गुजरती ट्रेनें ऐसे हालात में विस्थापित परिवार हर पल जान के खतरे के साए में जिंदगी गुजार रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि गंगा के बढ़ते जलस्तर ने उनके घरों को पानी में डुबो दिया है। मजबूरन परिवारों को रेलवे लाइन के किनारे अपना अस्थायी ठिकाना बनाना पड़ा है। खुले आसमान के नीचे पॉलिथीन और अस्थायी तंबुओं के सहारे गुजर-बसर कर रहे लोगों के लिए सबसे बड़ा खौफ ट्रेनों की आवाजाही का है। रेलवे ट्रैक से बेहद करीब रहने के कारण ट्रेन गुजरने के दौरान हादसे का खतरा बना रहता है।
पीड़ितों का कहना है कि बाढ़ के बाद से वे विस्थापन की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन और सरकार की ओर से राहत के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। लोगों को पॉलिथीन उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने में कथित तौर पर कोताही बरती जा रही है।
एक बाढ़ पीड़ित ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि एक तरफ घर और सामान पानी में डूब गया है, तो दूसरी तरफ जान जोखिम में डालकर रेलवे पटरी के किनारे रहना पड़ रहा है। राहत के नाम पर महज खानापूर्ति से उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थान पर तत्काल पुनर्वास और भोजन, पेयजल, शौचालय तथा अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करने की मांग की है।
सबसे गंभीर सवाल बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर है। रेलवे ट्रैक के किनारे बसे परिवारों के लिए हर गुजरती ट्रेन खतरे की घंटी बन जाती है। ऐसे में यदि समय रहते इन लोगों को सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से अपील की है कि राहत और बचाव कार्य में तेजी लाई जाए तथा पटरियों के किनारे रह रहे परिवारों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जाए। लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ पॉलिथीन नहीं, बल्कि मुकम्मल राहत और सुरक्षित आशियाने की जरूरत है।
रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह