कटिहार में गंगा-कोसी का कहर: मनिहारी में लोहे की कढ़ाई बनी नाव, जान जोखिम में डाल सैलाब पार करने को मजबूर ग्रामीण

कटिहार जिले में गंगा और कोशी का कहर जारी है। सबसे खराब हालात मनिहारी इलाके की है। जहां चारो तरफ फैले पानी के कारण पूरा जन-जीवन अस्त व्यस्त हो गया है....

कटिहार में गंगा-कोसी का कहर- फोटो : श्याम

Katihar : जिले में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि ने विकराल रूप धारण कर लिया है। उफनाती नदियों के कारण कटिहार के बरारी, अमदाबाद, मनिहारी और कुरसेला प्रखंडों के दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। चारों तरफ फैले सैलाब के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।


मनिहारी में नाव की किल्लत, लोहे की कढ़ाई बनी सहारा 

बाढ़ की सबसे भयावह स्थिति मनिहारी प्रखंड के दक्षिणी कांटाकोश क्षेत्र से सामने आई है। यहां सरकारी नावों की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण जुगाड़ तकनीक का सहारा लेने को मजबूर हैं। गांव के लोग जान जोखिम में डालकर गुड़ तैयार करने वाली लोहे की बड़ी-बड़ी कढ़ाइयों को नाव बनाकर उफनाती नदी पार कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें जान हथेली पर रखकर इस तरह यात्रा करनी पड़ रही है।


डीएम आशुतोष द्विवेदी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा 

दूसरी ओर, कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी लगातार बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा कर रहे हैं। डीएम खुद नावों और जलमग्न रास्तों के जरिए पीड़ितों के बीच पहुंचकर उनका हाल-चाल जान रहे हैं और राहत कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।


नावों की तैनाती और बोट एम्बुलेंस की शुरुआत 

स्थिति को लेकर जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि अमदाबाद, बरारी और कुरसेला जैसे अति-संवेदनशील इलाकों में सरकारी नावें चलाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी अतिरिक्त नावों की जरूरत महसूस हो रही है, वहां तुरंत नावें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावितों को तत्काल चिकित्सीय सुविधा देने के लिए बोट एम्बुलेंस भी तैनात की गई हैं।


राहत कार्यों में तेजी लाने की मांग 

प्रशासनिक दावों के बावजूद दूर-दराज के गांवों में नावों और सूखे राशन की किल्लत की शिकायतें मिल रही हैं। बाढ़ पीड़ितों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कांटाकोश जैसे सुदूर इलाकों में तुरंत पर्याप्त संख्या में सरकारी नावें उपलब्ध कराई जाएं ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर आ-जा सकें और किसी अनहोनी से बचा जा सके।

श्याम की रिपोर्ट