Bihar JEEVIKA: बिहार की टी क्वीन बनीं जीविका दीदियां, चला रहीं चाय फैक्ट्री, लाखों की हो रही कमाई

Bihar JEEVIKA: बिहार की जीविका दीदियां अब सिर्फ रसोई, सिलाई, पशुपालन, नर्सरी और कुटीर उद्योग तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपनी मेहनत, हुनर और हौसले के दम पर उद्योग जगत में भी नई मिसाल कायम कर रही हैं।

बिहार की दीदियों ने रचा इतिहास- फोटो : social Media

Bihar JEEVIKA:  बिहार की जीविका दीदियां अब सिर्फ रसोई, सिलाई, पशुपालन, नर्सरी और कुटीर उद्योग तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपनी मेहनत, हुनर और हौसले के दम पर उद्योग जगत में भी नई मिसाल कायम कर रही हैं। किशनगंज के पोठिया प्रखंड में महिलाओं द्वारा संचालित चायपत्ती प्रोसेसिंग और पैकेजिंग फैक्ट्री आत्मनिर्भर बिहार की एक शानदार तस्वीर पेश कर रही है। यहां दीदियों ने न केवल रोजगार के नए दरवाजे खोले हैं, बल्कि स्थानीय किसानों की आमदनी बढ़ाने का भी मजबूत जरिया तैयार किया है।

महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (एफपीसी) के बैनर तले पोठिया प्रखंड में संचालित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 45 महिलाएं किसानों से खरीदी गई ताजी चाय पत्तियों को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाली चायपत्ती तैयार कर रही हैं। इस पहल से महिलाओं को हर साल लाखों रुपये की आमदनी हो रही है, जबकि यहां कार्यरत कर्मचारियों को 10 हजार से 40 हजार रुपये तक मासिक वेतन मिल रहा है।

दरअसल, वर्ष 2010 में बिहार सरकार ने करीब 9.64 करोड़ रुपये की लागत से कुसियारी पंचायत के कालीदास किस्मत गांव में लगभग 10 एकड़ भूमि पर इस चाय कारखाने की स्थापना की थी। बाद में 14 जून 2021 को जीविका से जुड़ी 10 प्रमोटर महिलाओं के सहयोग से महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया और कारखाने की कमान महिलाओं के हाथों में सौंप दी गई।

जीविका अधिकारियों के मुताबिक पिछले सीजन में दीदियों ने करीब डेढ़ लाख किलो चायपत्ती तैयार की, जिसमें से एक लाख किलो से अधिक की बिक्री हो चुकी है। बाजार में लगातार बढ़ती मांग और महिलाओं के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए इस वर्ष 10 लाख किलो (एक हजार टन) चायपत्ती उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। किशनगंज की यह कहानी साबित करती है कि यदि महिलाओं को अवसर, संसाधन और भरोसा मिले तो वे सिर्फ अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने का माद्दा रखती हैं। जीविका दीदियों की यह कामयाबी आज बिहार में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुकी है।