आंसुओं पर भारी पड़ा हौसला: पिता को मुखाग्नि देने के 10 दिन बाद दिया इंटरव्यू,चौथे प्रयास में क्रैक किया UPSC

UPSC Success Story: बिहार में किशनगंज की जूही दास ने साक्षात्कार से महज 10 दिन पहले पिता को खोने वाली जूही ने बिना नियमित कोचिंग और सेल्फ स्टडी के दम पर चौथे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की है.

बिहार के किशनगंज की जूही दास ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 की परीक्षा में 649वीं रैंक हासिल कर एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी को भावुक कर देने वाली है। जूही की यह सफलता केवल उनकी शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण नहीं है, बल्कि उनके अटूट मानसिक साहस की कहानी है। अपने साक्षात्कार (इंटरव्यू) से महज 10 दिन पहले पिता को खोने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य को हासिल किया।

अंतिम संस्कार के बीच इंटरव्यू: संघर्ष भरी जीत

जूही के जीवन का सबसे कठिन समय तब आया जब 13 फरवरी को उनके पिता निवारण दास का बीमारी के कारण निधन हो गया। घर में शोक का माहौल था और पिता के अंतिम संस्कार व श्राद्ध कर्म की रस्में चल रही थीं। ठीक 11 दिन बाद, 24 फरवरी को उनका दिल्ली में यूपीएससी इंटरव्यू था। पिता को मुखाग्नि देने के बाद जूही ने अपने आंसू पोंछे और पिता के सपने को पूरा करने के लिए साक्षात्कार में शामिल हुईं, जिसका सुखद परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।

चौथे प्रयास में मिली कामयाबी, सेल्फ स्टडी बना हथियार

जूही को यह सफलता अपने चौथे प्रयास में मिली है। इससे पहले वे दो बार इंटरव्यू तक पहुँचकर भी अंतिम चयन से चूक गई थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान से नियमित पढ़ाई नहीं की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन नोट्स को दिया है। जूही ने विशाखापट्टनम से इंटरमीडिएट और कोलकाता से बीटेक करने के बाद खुद को पूरी तरह तैयारी में झोंक दिया था।

साधारण परिवार और माँ की प्रेरणा

किशनगंज के खगड़ा क्षेत्र की रहने वाली जूही एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके दिवंगत पिता घर के पास ही एक मोटर पार्ट्स की छोटी सी दुकान चलाते थे, जबकि उनकी माँ अन्निका दास न्यायमित्र के रूप में कार्यरत हैं। जूही का कहना है कि उन्हें इस मुकाम तक पहुँचने की सबसे बड़ी प्रेरणा अपनी माँ से मिली। परिवार के सीमित संसाधनों के बावजूद जूही की मेहनत ने आज उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) या भारतीय राजस्व सेवा (IRS) जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

किशनगंज में खुशी की लहर और उज्ज्वल भविष्य

जूही की इस उपलब्धि से पूरे किशनगंज जिले में खुशी की लहर है। शहरवासियों और शुभचिंतकों का उनके घर पर तांता लगा हुआ है। जूही ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो जीवन का सबसे बड़ा दुख भी आपको लक्ष्य से भटका नहीं सकता। उनकी यह कहानी अब उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो संसाधनों की कमी या व्यक्तिगत दुखों के कारण अपने सपनों को बीच में ही छोड़ देते हैं।