Ashokdham Stampede: सवालों के घेरे में अशोकधाम हादसे की जांच , जनसुराज ने कहा- चूक करने वाले ही करेंगे जांच तो जवाबदेही कौन तय करेगा?

Ashokdham Stampede: लखीसराय के अशोकधाम मंदिर के बाहर हुई भगदड़ में सात श्रद्धालुओं की मौत के बाद अब त्रासदी की जांच को लेकर सियासी सवाल भी उठने लगे हैं।

अशोकधाम हादसे की जांच पर उठे सवाल- फोटो : reporter

Ashokdham Stampede: लखीसराय के अशोकधाम मंदिर के बाहर हुई भगदड़ में सात श्रद्धालुओं की मौत के बाद अब मामला सिर्फ हादसे और राहत-बचाव तक सीमित नहीं रहा है। त्रासदी की जांच को लेकर सियासी सवाल भी उठने लगे हैं। जनसुराज नेता सूरज कुमार ने जिला प्रशासन की भूमिका पर तीखा निशाना साधते हुए कहा है कि जिस व्यवस्था पर चूक के आरोप लग रहे हैं, उसी व्यवस्था से जांच कराना जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।सूरज कुमार ने प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद जांच किसी छोटे अधिकारी या कर्मचारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच की शुरुआत इस सवाल से होनी चाहिए कि जिलाधिकारी स्तर पर धार्मिक आयोजन को लेकर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की क्या तैयारी की गई थी और उसका जमीन पर कितना पालन हुआ।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इतनी बड़ी घटना के बाद अब लखीसराय का जिला प्रशासन ही जांच करेगा कि लखीसराय के जिला प्रशासन से कहां चूक हुई।” उनके मुताबिक यह स्थिति बेहद हास्यास्पद है, क्योंकि जिस प्रशासनिक तंत्र पर व्यवस्था में कमी के सवाल उठ रहे हैं, उसी के जरिए जांच आगे बढ़ने पर निष्पक्ष जवाबदेही तय होने को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।

जनसुराज नेता ने हादसे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका दावा है कि 22 घायलों के इलाज के लिए सदर अस्पताल में शुरुआती समय में सिर्फ एक प्रशिक्षु डॉक्टर मौजूद थे। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि जब धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना थी, तो जिला प्रशासन ने चिकित्सा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की पहले से कितनी तैयारी की थी।

सूरज कुमार का कहना है कि जांच का दायरा केवल मौके पर मौजूद कर्मचारियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, भीड़ प्रबंधन, प्रवेश-निकास व्यवस्था, मेडिकल इमरजेंसी प्लान और प्रशासनिक निगरानी जैसे तमाम पहलुओं की पड़ताल होनी चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि आयोजन से पहले अधिकारियों के बीच किस स्तर पर समन्वय हुआ था।

उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था के प्रमुख होते हैं, इसलिए अगर व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करते समय शीर्ष स्तर की भूमिका को भी जांच के दायरे में लाना जरूरी है। उनके मुताबिक सिर्फ जांच कमेटी गठित कर देना और रिपोर्ट आने के बाद फाइल बंद कर देना सात मृत श्रद्धालुओं के साथ न्याय नहीं होगा।इस बयान के बाद अशोकधाम हादसा अब राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन गया है। एक तरफ प्रशासन हादसे के कारणों और घटनाक्रम की पड़ताल की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं विपक्षी और राजनीतिक आवाजें जवाबदेही की ऊपरी सीमा तय करने की मांग उठा रही हैं।

सूरज कुमार ने साफ कहा कि सात लोगों की जान गई है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद सुरक्षा इंतजामों में कमी क्यों रही और हादसे के बाद अस्पताल की तैयारी में खामियां क्यों दिखाई दीं।अब असली सियासी सवाल यही है कि जांच सिर्फ ‘किससे गलती हुई’ तक सीमित रहेगी या यह भी तय करेगी कि ‘गलती की जिम्मेदारी किसकी थी।’ सात श्रद्धालुओं की मौत के बाद लखीसराय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ घटना की जांच नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की जवाबदेही तय करना है, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

रिपोर्ट- कमलेश कुमार