Bihar Madhepura Stampede:सावन की आखिरी सोमवारी पर मधेपुरा के सिंहेश्वर धाम में भगदड़, आधा दर्जन जख्मी

Bihar Madhepura Stampede: सावन की अंतिम सोमवारी की अलसुबह सिंहेश्वर धाम मंदिर परिसर उस वक्त खौफ और अफरा-तफरी का गवाह बन गया, जब एक बड़ा हादसा टलते-टलते रह गया। ...

मधेपुरा के सिंहेश्वर धाम में भगदड़- फोटो : social Media

Bihar Madhepura Stampede: सावन की अंतिम सोमवारी की अलसुबह सिंहेश्वर धाम मंदिर परिसर उस वक्त खौफ और अफरा-तफरी का गवाह बन गया, जब एक बड़ा हादसा टलते-टलते रह गया। सुबह करीब 6:25 से 7:00 बजे के बीच, जब  श्रद्धालुओं का हुजूम भोले बाबा के मंदिर में जलाभिषेक के लिए उमड़ा, तो मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर अंधेरगर्दी और बदइंतज़ामी का मंजर पैदा हो गया। एक पल में ही पूजा की जगह चीख-पुकारऔर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।

भीड़ बेकाबू, मची भगदड़ जान बचाने की जद्दोजहद

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मुख्य गेट पर अचानक धक्का-मुक्की और दबाव इतना बढ़ा कि श्रद्धालुओं का तांता आपा खो बैठा। देखते ही देखते अफरा-तफरी का आलम बन गया। धक्का-मुक्की में आधा दर्जन से ज्यादा लोग नीचे गिर पड़े और भीड़ के पैरों तले रौंदे जाने लगे। चीख-पुकार के बीच लोग अपने परिजनों को सुरक्षित निकालने के लिए जान की बाजी लगाने लगे। इस लापरवाही का शिकार होकर चार महिलाएं और दो मर्द बुरी तरह जख्मी हो गए। कई महिलाओं का भीड़ में दम घुटने लगा था, जिन्हें ऐन वक्त पर अगर सुरक्षाकर्मी बाहर न खींचते, तो हादसा हो सकता था।

प्रशासन की फौरी कार्रवाई

हालात को बेकाबू और ‘जरायम’ के मुहाने पर देख मौके पर तैनात पुलिसिया अमले और लोकल वॉलेन्टियर्स ने मोर्चा संभाला। हालांकि, जिले के डीएम और एसपी खुद इस पूरी व्यवस्था की निगरानी का दंभ भर रहे थे, फिर भी मुख्य गेट पर सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी साफ उजागर हो गई। गनीमत रही कि सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की मुस्तैदी से घायलों को वक्त रहते रेस्क्यू कर लिया गया और एक बहुत बड़ा हादसा होने से बाल-बाल टल गया।

अस्पताल में भर्ती ज़ख्मी, जांच का दायरा तेज

घायलों को फौरन इलाज के लिए मधेपुरा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहां उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। इस वारदात के बाद मंदिर परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस महकमा अब इस बात की जांच-पड़ताल कर रहा है कि आखिर इतने सख्त पहरे के बावजूद मुख्य द्वार पर यह ‘खलल’ और अनहोनी कैसे पैदा हुई।

फिलहाल सिंहेश्वर धाम में स्थिति को काबू में कर लिया गया है और दर्शन-पूजन का सिलसिला दोबारा सामान्य तरीके से शुरू करा दिया गया है। लेकिन इस घटना ने त्योहारों पर प्रशासनिक दावों की कलई जरूर खोल दी है।