डीआईजी का 'बड़ा एक्शन': एक्सीडेंट केस में 'पंचायती' कर आरोपी को बचाने वाले इंस्पेक्टर सहित इतने नपे, महकमे में मचा हड़कंप

भ्रष्टाचार और कर्तव्यहीनता के खिलाफ पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। डीआईजी ने आरोपी ट्रैक्टर मालिक को बचाने के लिए पीड़ित पर दबाव बनाने और रिश्वत के खेल में शामिल इंस्पेक्टर और दरोगा को निलंबित कर दिया है।

Motihari - चंपारण रेंज के डीआईजी हतिकिशोर राय ने भ्रष्टाचार में संलिप्त पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ा कड़ा रुख अपनाते हुए सुगौली के सर्किल इंस्पेक्टर और एक दरोगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि इन पुलिस अधिकारियों ने ट्रैक्टर हादसे में हुई एक मौत के मामले में आरोपी को बचाने के लिए पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया और 'पंचायती' के जरिए सुलह की कोशिश की।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला सुगौली थाना कांड संख्या-438/25 से जुड़ा है। 15 अगस्त 2025 को एक सड़क दुर्घटना में इमतरी खातून के पति मो० अलियास की ट्रैक्टर की टक्कर से मौत हो गई थी। इस मामले में अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज थी। लेकिन न्याय की जगह पुलिस ने भ्रष्टाचार का रास्ता चुना।

वर्दी की आड़ में आरोपी को संरक्षण

जांच में खुलासा हुआ कि घटना के एक सप्ताह के भीतर ही सुगौली सर्किल इंस्पेक्टर अशोक पांडेय ने ट्रैक्टर मालिक ब्रजेश कुमार मिश्रा से सांठ-गांठ कर ली। उन्होंने अपनी मध्यस्थता में पीड़ित पक्ष को 60 हजार रुपये दिलवाकर ट्रैक्टर मालिक का नाम केस से हटाने के लिए वादिनी पर भारी दबाव बनाया।

सीडीआर (CDR) ने खोली इंस्पेक्टर की पोल

जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ट्रैक्टर मालिक का भाई स्वयं बिहार पुलिस में दरोगा है। सर्किल इंस्पेक्टर के फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से पता चला कि वे आरोपी के भाई के साथ लगातार संपर्क में थे। इसी प्रभाव में आकर 4 महीने बीत जाने के बाद भी केस की पर्यवेक्षण टिप्पणी (Supervision Note) जारी नहीं की गई थी, ताकि मुख्य अभियुक्त को बचाया जा सके।

इन पर गिरी निलंबन की गाज

  • अशोक कुमार पाण्डेय (सर्किल इंस्पेक्टर, सुगौली): कर्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता और बाहरी प्रभाव में आकर अनुसंधान को बाधित करने के आरोप में निलंबित।

  • निधि कुमारी (अनुसंधानकर्ता दरोगा, सुगौली): केस के अनुसंधान में घोर लापरवाही बरतने के लिए तत्काल प्रभाव से निलंबित। एसपी ने उनसे विभागीय कार्रवाई के तहत स्पष्टीकरण भी मांगा है।


एसपी स्वर्ण प्रभात के जनता दरबार में इस मामले का खुलासा हुआ था, जिसके बाद प्रशिक्षु डीएसपी रिषभ कुमार ने मामले की गहराई से जांच की और अपनी रिपोर्ट सौंपी। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पुलिस की छवि धूमिल करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

Report - himanshu mishra