Bihar News: मानवता को शर्मसार करने वाला मामला, इस कारण तीन दिन तक नहीं हो सका वृद्ध महिला का दाह संस्कार
Bihar News: मृत्यु के तीन दिनों तक वृद्ध महिला का दाह संस्कार नहीं हो सका। यह दर्दनाक स्थिति केवल इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि गाँव के एक दबंग परिवार ने मृतक के घर तक जाने वाले रास्ते को चारों तरफ से काँटेदार तार से बंद कर दिया था।
Bihar News:एक वृद्ध महिला की मृत्यु के बाद मानवता शर्मसार करने वाला मामला सामने आया। मृत्यु के तीन दिनों तक वृद्ध महिला का दाह संस्कार नहीं हो सका। यह दर्दनाक स्थिति केवल इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि गाँव के एक दबंग परिवार ने मृतक के घर तक जाने वाले रास्ते को चारों तरफ से काँटेदार तार से बंद कर दिया था। परिवार का यह व्यवहार न केवल कानून की अवहेलना थी, बल्कि संवेदनाओं की भी ठेस पहुँचाने वाला था। मामला मुंगेर के बरियारपुर थाना क्षेत्र के करहरिया पूर्वी पंचायत स्थित रघुनाथपुर भेलबा गाँव की है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मृतक परिवार ने हर संभव प्रयास किया, मुखिया से लेकर थाना और सीओ, SDO तक लेकिन किसी ने भी उनके निवेदन पर ध्यान नहीं दिया। स्थिति इतनी कठिन हो गई कि मृतक के परिजन के लिए अपने ही परिवार के शव का दाह संस्कार कराना असंभव हो गया। ऐसे में गाँव की आम जनता और पड़ोसियों की भी संवेदनाएँ झकझोर उठीं।
जब यह मामला मीडिया के संज्ञान में आया, तब स्थिति ने एक नया मोड़ लिया। मीडिया कर्मियों ने उच्च अधिकारियों को इस अमानवीय स्थिति से अवगत कराया। इसके तुरंत बाद पुलिस सक्रिय हुई और गाँव पहुंच कर रास्ता मुक्त कराया। अंततः वृद्ध महिला का शव सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।
इस घटना ने समाज के समक्ष कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या संवेदनाओं और मानवाधिकारों की कीमत दबंगतंत्र के आगे इतनी कम है? क्या मृतक और उनके परिवार के लिए सम्मान की गुहार भी सुनवाई के योग्य नहीं है? तीन दिन तक शव को अपने घर में रखकर परिजन जिस मानसिक और भावनात्मक कष्ट से गुजरे, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है।
मुंगेर का यह मामला केवल एक गाँव का नहीं, बल्कि पूरे समाज की उस तस्वीर को दर्शाता है जहाँ ताकतवर और दबंग अपनी इच्छानुसार कानून और मानवता की सीमा पार कर सकते हैं। मीडिया की सक्रियता और प्रशासन की देर से की गई कार्रवाई ने भले ही वृद्ध महिला को अंतिम संस्कार की मानवीय गरिमा दिलाई, लेकिन यह घटना हमें मानवता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के महत्व पर सोचने के लिए मजबूर करती है।
रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान