BPSC Success story: 14 घंटे की पढ़ाई, 4 साल का जुनून और हौसलों की उड़ान, साधारण परिवार की बेटी रागिनी बनीं बीडीओ, संघर्ष ने लिखी कामयाबी की नई इबारत

BPSC Success story: एक साधारण परिवार से आने वाली रागिनी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज और राज्य के विकास में योगदान देने का था। ....

साधारण परिवार की बेटी बनीं बीडीओ- फोटो : reporter

BPSC Success story: मुजफ्फरपुर की धरती से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों, लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग के दम पर किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। औराई प्रखंड के बेदौल गांव की रहने वाली रागिनी कुमारी ने चार वर्षों की कठिन तपस्या और प्रतिदिन 12 से 14 घंटे की पढ़ाई के बल पर बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया है।

रागिनी की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है। एक साधारण परिवार से आने वाली रागिनी ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज और राज्य के विकास में योगदान देने का था। इसी संकल्प को लेकर उन्होंने लगातार चार वर्षों तक कठिन परिश्रम किया और आखिरकार पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहरा दिया।

रागिनी बताती हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने हर दिन 12 से 14 घंटे तक पढ़ाई की और अपने लक्ष्य पर पूरा फोकस बनाए रखा। उनका कहना है कि अब सरकार की ओर से जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसे पूरी ईमानदारी और जवाबदेही के साथ धरातल पर उतारने का प्रयास करेंगी।

रागिनी के पिता रामसागर बैठा अपनी बेटी की सफलता पर भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि आर्थिक परिस्थितियां बहुत मजबूत नहीं थीं, लेकिन बेटी की प्रतिभा और लगन को देखते हुए परिवार ने हर संभव सहयोग किया। दो वर्षों तक पटना में रहकर तैयारी कराने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन आज उसकी मेहनत रंग लाई है।

वहीं रागिनी की मां ने कहा कि बेटी बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही है। पूरे परिवार ने उसे आगे बढ़ाने के लिए हर कदम पर हौसला दिया। भाई, भाभी और पिता सभी ने मिलकर उसके सपनों को उड़ान दी।रागिनी की यह सफलता सिर्फ एक नौकरी पाने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और सपनों को सच करने की ऐसी मिसाल है, जो हजारों युवाओं, खासकर बेटियों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा देगी।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा