बिहार पुलिस में बड़ा एक्शन:महुआ SDPO संजीव कुमार पर गिरेगी गाज, शराब माफिया को संरक्षण और 2100 केस लटकाने का आरोप! अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा

वैशाली के महुआ SDPO संजीव कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा. DIG तिरहुत क्षेत्र चन्दन कुशवाहा ने बिहार पुलिस मुख्यालय को भेजी रिपोर्ट. शराब माफिया को संरक्षण देने और 2100+ केस पेंडिंग रखने का है गंभीर आरोप

महुआ SDPO संजीव कुमार पर गिरेगी गाज, शराब माफिया को संरक्षण और 2100 केस लटकाने का आरोप!- फोटो : Reporter

बिहार पुलिस महकमे से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां वैशाली जिले के महुआ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) संजीव कुमार के खिलाफ गंभीर प्रशासनिक शिथिलता और लापरवाही को लेकर गाज गिरनी तय हो गई है। तिरहुत क्षेत्र (मुजफ्फरपुर) के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महुआ एसडीपीओ के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई (Disciplinary Action) की मजबूत अनुशंसा की गई है। एसपी वैशाली के जांच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए डीआईजी ने अंतिम कार्रवाई के लिए बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना को रिपोर्ट भेज दी है।


शराब माफिया प्रभात सिंह पर मेहरबानी और गंभीर मामलों में लापरवाही

एसडीपीओ संजीव कुमार पर लगे आरोपों की फेहरिस्त काफी लंबी है। जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत सक्रिय गिरोहों और शराब माफिया प्रभात सिंह के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई। माफिया बेखौफ होकर स्थानीय प्रशासन के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार चलाता रहा, लेकिन एसडीपीओ द्वारा उसकी गिरफ्तारी का कोई प्रयास नहीं हुआ। इसके अलावा, मद्यनिषेध (शराबबंदी) और साल 2012 से 2018 के बीच के लंबित 4 नक्सली कांडों के अनुसंधान में भी उनकी तरफ से भारी शिथिलता और लापरवाही पाई गई है।

कबाड़ बनी वारंट पंजी और फाइलों में दबे रहे हजारों केस

समीक्षा के दौरान पाया गया कि एसडीपीओ संजीव कुमार के पास पदस्थापन के समय से ही हजारों कांड लंबित पड़े रहे। फरवरी 2026 के अंत तक करीब 2146 कांडों का निष्पादन लंबित पाया गया। इसके अलावा, पिछले 7 महीनों में उन्हें सौंपे गए 5 विशेष महत्वपूर्ण कांडों के अनुसंधान में एक दिन की भी केस डायरी (कांड दैनिकी) नहीं लिखी गई। उनके क्षेत्र में थानों की वारंट पंजी, इश्तेहार और कुर्की-जब्ती की स्थिति अत्यंत त्रुटिपूर्ण और दयनीय पाई गई, जिसपर उन्होंने कभी कोई समीक्षा बैठक या सुधार के निर्देश नहीं जारी किए।


बैठकों से गायब रहने और वित्तीय शिथिलता का भी आरोप

प्रशासनिक मोर्चे पर भी एसडीपीओ संजीव कुमार का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब पाया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उन्होंने अपने पूरे अनुमंडल में मात्र 3 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का ही निरीक्षण किया। यही नहीं, जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच उन्होंने एक भी विभागीय जांच को पूरा नहीं किया और पुलिस अधीक्षक द्वारा बुलाई गई बैठकों व सामूहिक संचालनों से भी लगातार नदारद रहे। डीआईजी कार्यालय द्वारा कुल 13 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद इस कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया गया है।

रिपोर्ट -  मणिभूषण