साइकिल से 15 हजार किमी की यात्रा कर लौटे बिक्कु कुमार, 188 दिनों में किया चारधाम और 12 ज्योतिर्लिंग का दर्शन

साइकिल से 15 हजार किमी की यात्रा कर लौटे बिक्कु कुमार- फोटो : राज


Nalanda  : नालंदा जिले के परवलपुर प्रखंड अंतर्गत अस्तुपुर गांव के युवा बिक्कु कुमार ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस से एक नया इतिहास रच दिया है। बिक्कु साइकिल से देश के चारधाम और 12 ज्योतिर्लिंगों की कठिन यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर अपने गृह जिला लौटे हैं। घर वापसी पर स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और भारत माता के जयघोष के साथ उनका भव्य अभिनंदन किया। उनकी इस उपलब्धि को पूरे इलाके के लिए गौरव का क्षण माना जा रहा है।


बिक्कु कुमार ने इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को मात्र 188 दिनों में पूरा किया, जिसके दौरान उन्होंने करीब 15 हजार किलोमीटर की दूरी तय की। इस लंबी यात्रा में उन्होंने यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे दुर्गम चारधामों के साथ-साथ देश के विभिन्न कोनों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए। इतनी लंबी दूरी को साइकिल से तय करना न केवल उनके शारीरिक सामर्थ्य को दर्शाता है, बल्कि उनके अटूट संकल्प और अनुशासन का भी जीवंत उदाहरण पेश करता है।


इस साहसी यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि बिक्कु इसके माध्यम से युवाओं को एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश देना चाहते थे। उन्होंने बताया कि यात्रा का मुख्य लक्ष्य नई पीढ़ी को नशामुक्त जीवन, नियमित योग और फिटनेस के प्रति जागरूक करना था। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों को प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने और प्रदूषण कम करने के लिए साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील भी की।


अपनी इस अविस्मरणीय यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए बिक्कु ने बताया कि 188 दिनों के इस सफर में उन्हें खराब मौसम, भारी बारिश और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों जैसी कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कई बार रास्ते चुनौतीपूर्ण थे, लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में लोगों से मिले प्रेम और सहयोग ने उनका हौसला बनाए रखा। उन्होंने कहा कि लोगों ने जगह-जगह उनके रुकने और भोजन की व्यवस्था कर उनके मिशन को सफल बनाने में मदद की।


गौरतलब है कि इस अभियान में बिक्कु कुमार के साथ तेलंगाना के विक्रम कुमार और मुजफ्फरपुर के दीपक कुमार गुप्ता भी शामिल थे। इन तीनों युवाओं ने मिलकर 405 दिनों के सामूहिक प्रयास के बाद इस मिशन को पूरा किया। स्थानीय लोगों ने बिक्कु के साहस की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यह यात्रा आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह साबित करती है कि मजबूत इरादों के साथ किसी भी मंजिल को पाना संभव है।


राज की रिपोर्ट