नालंदा बवाल: पुलिस पर 'हत्या' का आरोप गलत,चश्मदीद मुखिया का बड़ा खुलासा
नालंदा के हरनौत के चेरन गांव के पास सड़क हादसे के बाद भड़की हिंसा में 8 पुलिसकर्मी घायल हुए। कुछ जगहों पर पुलिस को बदनाम करने की कोशिश हुई, लेकिन चश्मदीद स्थानीय मुखिया ने साफ कहा कि पुलिस ने तो पीड़ित की मदद की थी। अफवाहों से बचें और सच जानें!
बिहार के नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र के चेरन गांव के पास एक सड़क दुर्घटना में युवक की मौत के बाद भड़की हिंसा ने तूल पकड़ लिया है। हादसे के बाद उग्र भीड़ ने रजौली–बख्तियारपुर मुख्य सड़क को जाम कर जमकर उपद्रव किया। पुलिस पर हुए भारी पथराव में दो इंस्पेक्टर सहित आठ पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को लाठीचार्ज, आंसू गैस और हवाई फायरिंग का सहारा लेना पड़ा।
उपद्रव और पुलिस की कार्रवाई
घटना की शुरुआत चेरन गांव निवासी प्रद्युम्न कुमार की सड़क हादसे में मौत के बाद हुई। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सदर डीएसपी-2 संजय कुमार जायसवाल के अनुसार, समझाने-बुझाने के तमाम प्रयासों के बावजूद भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस पर पथराव और आगजनी शुरू कर दी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने नियमानुसार हल्का बल प्रयोग किया। फिलहाल पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर रही है।
पुलिस की छवि धूमिल करने की कोशिश मुखिया का बयान
इस संवेदनशील मामले को लेकर कुछ मीडिया माध्यमों द्वारा पुलिस की छवि को धूमिल करने और उन पर 'हत्या' का झूठा आरोप लगाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, घटना के वक्त मौके पर मौजूद स्थानीय मुखिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सच्चाई सामने रखी है।स्थानीय मुखिया का स्पष्ट कहना है कि पुलिस पर लगाया जा रहा हत्या का आरोप पूरी तरह गलत है।
पुलिस ने की थी मदद
दुर्घटना के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित की हरसंभव मदद करने का प्रयास किया था।सड़क हादसे के बाद पुलिस का रवैया पूरी तरह सहयोगात्मक था। कुछ तत्वों द्वारा इस दुखद हादसे को गलत रूप देकर पुलिस को बदनाम करने और माहौल बिगाड़ने की साजिश की जा रही है।— स्थानीय मुखिया - प्रशासन ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल मामले की निष्पक्ष जांच जारी है।