नालंदा के सुब्रत शांडिल्य की स्वदेशी पहल, बनाएंगे किफायती जेट इंजन

नालंदा के युवा एयरोस्पेस इंजीनियर और उद्यमी सुब्रत शांडिल्य देश की एयरोस्पेस तकनीक को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। उनका उद्देश्य एक ऐसा जेट इंजन तैयार करना है, जिसकी निर्माण लागत काफी कम हो और जिसे अलग-अलग मिशनों की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा

नालंदा के सुब्रत बनाएंगे किफायती जेट इंजन- फोटो : राज

Nalanda : जिले के युवा एयरोस्पेस इंजीनियर और उद्यमी सुब्रत शांडिल्य देश की एयरोस्पेस तकनीक को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। उन्होंने किफायती स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने के लिए अपने स्टार्टअप 'शांडिल्य एयरोस्पेस' के माध्यम से एक विशेष पहल शुरू की है। यदि उनके इस प्रस्ताव का चयन होता है, तो बिहार में देश का पहला कॉम्पैक्ट जेट इंजन निर्माण कारखाना स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।


किलो न्यूटन श्रेणी के कॉम्पैक्ट जेट इंजन पर काम जारी

सुब्रत मुख्य रूप से 2 किलो न्यूटन श्रेणी के कॉम्पैक्ट जेट इंजन पर काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य एक ऐसा जेट इंजन तैयार करना है, जिसकी निर्माण लागत काफी कम हो और जिसे अलग-अलग मिशनों की आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सके। भविष्य में इस स्वदेशी इंजन का इस्तेमाल मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी/ड्रोन) और विभिन्न एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म में प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।


3D प्रिंटिंग तकनीक से आसान और प्रभावी होगा निर्माण

पारंपरिक इंजनों की जटिल और खर्चीली निर्माण प्रक्रिया का तोड़ निकालने के लिए सुब्रत मेटल 3D प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इस तकनीक की मदद से जटिल आकार वाले कलपुर्जों को कम चरणों में तैयार किया जा सकता है। इससे न केवल इंजन का प्रोटोटाइप जल्दी तैयार होगा, बल्कि भविष्य में डिजाइन में बदलाव और उत्पादन प्रक्रिया को भी बेहद आसान और किफायती बनाया जा सकेगा।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमान डिजाइन में बना चुके हैं पहचान

ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, देहरादून से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सुब्रत छात्र जीवन से ही ड्रोन और विमान डिजाइनिंग में सक्रिय रहे हैं। उनके एक विमान प्रारूप का चयन अमेरिका के डार्पा लिफ्ट चैलेंज (DARPA Lift Challenge) के शुरुआती चरण में हुआ था, जहाँ दुनिया भर के 500 से अधिक आवेदनों में से चुने गए 72 डिजाइनों में उनका प्रोजेक्ट शामिल था।


डिजाइन को हार्डवेयर में बदलना मुख्य चुनौती, बिहार को मिलेगी नई पहचान

सुब्रत के अनुसार, किसी भी युवा एयरोस्पेस कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती कागजी डिजाइन को वास्तविक हार्डवेयर में बदलकर उसका सफल परीक्षण करना होता है। फिलहाल उनकी टीम प्रोटोटाइप निर्माण और परीक्षण क्षमता विकसित करने में जुटी है। यदि यह प्रोजेक्ट धरातल पर उतरता है, तो बिहार कॉम्पैक्ट जेट प्रोपल्शन तकनीक के क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनकर उभरेगा।


राज की रिपोर्ट