नवादा के भरौसा मध्य विद्यालय में छठ महापर्व की भव्य झांकी: लोक आस्था और संस्कृति से रूबरू हुए बच्चे, प्रधानाचार्य ने पढ़ाए संस्कार के पाठ

नवादा में छठ महापर्व की भव्य झांकी- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : जिले के सदर प्रखंड के ओरैना पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भरौसा में लोक आस्था के महापर्व छठ की धार्मिक महत्ता और बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से एक भव्य झांकी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पूरा विद्यालय परिसर छठी मईया के पारंपरिक गीतों और सूर्योपासना के मनमोहक दृश्यों से पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।


पारंपरिक वेशभूषा और सूप-दउरे के साथ बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर छठ महापर्व की विभिन्न धार्मिक परंपराओं को बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। सूप, दउरा, ठेकुआ और मौसमी फलों से सजे प्रसाद के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने और छठी मईया की आराधना के दृश्यों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। बच्चों ने पारंपरिक गीतों के माध्यम से लोक आस्था और पारिवारिक एकता का संदेश दिया।


किताबी ज्ञान के साथ संस्कार और संस्कृति की शिक्षा जरूरी: प्रधानाचार्य

विद्यालय के प्रधानाचार्य सुजीत कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों को अपनी संस्कृति, संस्कारों और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना भी है। ऐसे आयोजनों से बच्चों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बढ़ता है और वे परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं।


छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता

इस विशेष कार्यक्रम में निशा कुमारी, आराध्या कुमारी शर्मा, नेहा, संजना, स्वीटी, प्रीति, कुमकुम, करिश्मा, काजल, राखी, अंशु, प्रिन्सी, सोनाली, निहारिका, संगम, स्मिता, रूपा, रानी, आसमा, सुहानी, अनुष्का और नरेंद्र कुमार सहित कई विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान शिक्षक सूर्यभूषण प्रसाद, संजीव कुमार, कुणाल, मो. वशी, सुनीता कुमारी, बबली कुमारी, सुधा कुमारी, सोनी कुमारी, मंजू कुमारी तथा स्वच्छता पर्यवेक्षक प्रेम कुमार शर्मा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।


आधुनिक शिक्षा के साथ पारंपरिक संस्कृति का संरक्षण समय की मांग

यह आयोजन इस बात का संदेश देता है कि आधुनिक शिक्षा के दौर में भी अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करना उतना ही आवश्यक है। इस तरह के आयोजनों से बच्चों का मानसिक और सांस्कृतिक विकास होता है, जिससे वे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं।


अमन की रिपोर्ट