Bihar News : सरकारी नौकरी से मोहभंग! बिहार में नियुक्ति के बाद भी 173 डॉक्टरों ने नहीं किया ज्वाइन, स्वास्थ्य विभाग ने 10 दिनों का दिया मौका

Bihar News : बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. राज्य में सरकारी सेवा के लिए चयनित डॉक्टर नौकरी में खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं....पढ़िए आगे

सरकारी नौकरी से मोहभंग - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण इलाज कराने आ रहे गरीब और लाचार मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. एक तरफ जहां अस्पताल डॉक्टरों की किल्लत से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार द्वारा नियुक्त किए गए नए चिकित्सक सरकारी नौकरी करने से कतरा रहे हैं. स्थिति यह है कि स्थायी बहाली के बावजूद बड़ी संख्या में डॉक्टर सेवा में योगदान देने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं.

दरअसल, बिहार सरकार ने राज्य की चरमराती चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए विभिन्न सरकारी अस्पतालों में 1723 विशेषज्ञ एवं सामान्य चिकित्सकों की नियुक्ति की थी. इन सभी नवनियुक्त डॉक्टरों को अलग-अलग जिलों के अस्पताल भी आवंटित कर दिए गए थे ताकि वे तुरंत कार्यभार संभाल सकें. लेकिन सरकार की इस कसरत पर डॉक्टरों के उदासीन रवैये ने पानी फेर दिया है.

नियम के मुताबिक, इन सभी चयनित डॉक्टरों को अस्पतालों में योगदान करने के लिए पूरे 30 दिनों का पर्याप्त समय दिया गया था. इसके बावजूद, निर्धारित समयसीमा बीत जाने तक 173 डॉक्टरों ने इस सरकारी नौकरी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और अपने आवंटित अस्पतालों में पदभार ग्रहण करने नहीं पहुंचे. डॉक्टरों के इस कदम से स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं.

नौकरी ज्वाइन न करने वाले डॉक्टरों के इस रवैये को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब कड़ा रुख अपनाया है. विभाग ने इन सभी अनुपस्थित डॉक्टरों को एक और आखिरी मौका देते हुए अगले 10 दिनों के भीतर ज्वाइन करने का अल्टीमेटम दिया है. सूत्रों की मानें तो सुदूर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और मनमुताबिक पोस्टिंग न मिलने के कारण डॉक्टर इन क्षेत्रों में जाने से परहेज कर रहे हैं.

डॉक्टरों की इस आनाकानी का सीधा खामियाजा उन आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जो दूर-दराज के गांवों से इलाज की उम्मीद में सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटते हैं. अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई इस 10 दिनों की नई समयसीमा के बाद भी जो डॉक्टर काम पर नहीं जाते हैं, उन पर सरकार क्या सख्त कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई करती है.