डाक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर भव्य कार्यक्रम का हुआ आयोजन, डॉ. बिधान चंद्र रॉय को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
डाक्टर्स डे की पूर्व संध्या पर पटना में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जाने-माने फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने वर्तमान समय में चिकित्सा के क्षेत्र में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया....
Patna : 'राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस' (National Doctors' Day) की पूर्व संध्या पर आज 30 जून को बिहार इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन के सभागार में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी समारोह को संबोधित करते हुए 'पब्लिक अवेयरनेस फॉर हेल्थफुल एपरोच फॉर लिविंग' (पहल) के चिकित्सा निदेशक एवं प्रख्यात फिजिशियन डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने भारत के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. रॉय का जीवन सेवा, समर्पण और चिकित्सा उत्कृष्टता का एक अनुपम उदाहरण है।
चिकित्सा सेवा ईश्वर का सर्वोत्तम वरदान
युवा डॉक्टरों को प्रेरित करते हुए डॉ. दिवाकर तेजस्वी ने कहा कि चिकित्सा सेवा ईश्वर द्वारा मानव जाति को दिया गया सबसे अनमोल वरदान और पेशा है। इस पेशे के माध्यम से चिकित्सकों को समाज के हर वर्ग, विशेषकर असहाय और बीमार लोगों की नि:स्वार्थ सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। जब एक चिकित्सक किसी गंभीर रूप से पीड़ित रोगी को स्वस्थ करता है, तो वह केवल उसका इलाज नहीं करता, बल्कि उसके और उसके पूरे परिवार के जीवन में नई आशा, विश्वास तथा साहस का संचार करता है।
नैतिक मूल्यों और गरिमा को बनाए रखना सामूहिक दायित्व
डॉ. तेजस्वी ने वर्तमान समय में चिकित्सा के क्षेत्र में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशे की गरिमा, गुणवत्ता और समाज के अटूट विश्वास को अक्षुण्ण रखना देश के प्रत्येक चिकित्सक का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने युवा डॉक्टरों से पुरजोर आग्रह किया कि वे केवल व्यावसायिकता की ओर न भागें, बल्कि ज्ञान, संवेदनशीलता, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों को अपने जीवन और कार्यप्रणाली का मुख्य आधार बनाएं।
दवा के साथ व्यवहार और संवेदना भी जरूरी
कार्यक्रम के दौरान डॉ. तेजस्वी ने एक आदर्श चिकित्सक की परिभाषा को रेखांकित करते हुए कहा कि एक अच्छा डॉक्टर केवल महंगी दवाइयों से मरीज को ठीक नहीं करता। दवाइयों के साथ-साथ डॉक्टर का सकारात्मक व्यवहार, मरीज के प्रति उसकी गहरी संवेदना और अपने काम के प्रति समर्पण ही रोगी के आधे दुख को दूर कर देता है। यही वह गुण है जो एक चिकित्सक को समाज में भगवान का दर्जा दिलाता है और चिकित्सा सेवा को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।
गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प
समारोह के समापन पर उन्होंने देश के सभी चिकित्सकों को 'भारतीय चिकित्सक दिवस' (1 जुलाई) की अग्रिम शुभकामनाएं और बधाई दी। उन्होंने अटूट विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक चुनौतियों के बावजूद भारत का चिकित्सा जगत अपनी सेवा, नैतिकता और उत्कृष्टता की गौरवशाली परंपरा को भविष्य में भी निरंतर सशक्त बनाए रखेगा। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ एवं युवा डॉक्टर और गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने डॉ. बी.सी. रॉय के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
रोहित की रिपोर्ट