बिहार की राजनीति में पीएम मोदी को दी गई "गाली" बनी नई गोली, दरभंगा से उठी " अपशब्द की गूंज", पटना की सड़कों तक छिड़ा महासंग्राम, चुनावी गणित में ये हो सकता है असर
Narendra Modi Gaali: इतिहास गवाह है कि चुनावी माहौल में दिया गया विवादित बयान या अपशब्द कई बार किसी पार्टी की किस्मत पलट देता है।
Narendra Modi Gaali: दरभंगा की धरती से उठी एक गाली ने पूरे बिहार की राजनीति को हिला कर रख दिया है। "वोटर अधिकार यात्रा" के दौरान महागठबंधन के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और देखते ही देखते यह मामला चुनावी माहौल को गर्मा देने वाला मुद्दा बन गया। महज एक शब्द ने महागठबंधन और बीजेपी के बीच सियासी युद्ध छेड़ दिया है।
दरभंगा में कांग्रेस मंच से दिए गए इस बयान के बाद बीजेपी आग बबूला हो गई। पटना की सड़कों पर कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट हुई, लाठियां चलीं, कई घायल हुए। पुलिस को हालात काबू में करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इधर, पीएम मोदी को गाली देने वाला आरोपी मोहम्मद रिजवी उर्फ राजा गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन असली विवाद इस बात को लेकर है कि यह मंच कांग्रेस युवा नेता मोहम्मद नौशाद का था। बीजेपी ने उन पर भी एफआईआर दर्ज कराई है। नौशाद सफाई देते हुए कह रहे हैं कि घटना के समय वे राहुल गांधी के साथ मुजफ्फरपुर में थे, मंच पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने माफी भी मांगी, लेकिन राजनीतिक तूफान अब थमने वाला नहीं है।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी बयान ने चुनावी हवा का रुख मोड़ दिया हो। राजनीति की धरती पर "जुबान" कई बार सबसे घातक हथियार साबित हुई है।2007, गुजरात चुनाव: सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को "मौत का सौदागर" कहा। बीजेपी ने इसे गुजराती अस्मिता से जोड़ दिया। नतीजा—117 सीटें बीजेपी की झोली में और कांग्रेस महज 59 पर सिमटी।
2015, बिहार चुनाव: पीएम मोदी ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा "DNA में खराबी है।" महागठबंधन ने इसे बिहारी अस्मिता से जोड़कर भुनाया। नतीजा महागठबंधन को 178 सीटें, जबकि NDA 58 पर ढेर।
2022, गुजरात चुनाव: मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी की तुलना "रावण" से की। जनता ने इसे गुजरात का अपमान माना और बीजेपी ने इतिहास रचते हुए 156 सीटें जीतीं। कांग्रेस महज 17 सीटों पर सिमट गई।
इतिहास गवाह है कि चुनावी माहौल में दिया गया विवादित बयान या अपशब्द कई बार किसी पार्टी की किस्मत पलट देता है।
बीजेपी अब इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर गांव-गांव तक यह प्रचारित किया जाएगा कि "महागठबंधन ने पीएम और उनकी मां का अपमान किया है।" बीजेपी जानती है कि नरेंद्र मोदी के नाम पर भावनाओं की लहर कैसे खड़ी की जाती है। "मौत का सौदागर" और "DNA" वाले बयान की तरह ही यह मुद्दा भी जनता के दिल को छू सकता है।
दूसरी ओर महागठबंधन की मुश्किल यह है कि राहुल गांधी की "वोटर अधिकार यात्रा" को यह विवाद ढक सकता है। जिस यात्रा से कांग्रेस को संजीवनी देने की कोशिश हो रही थी, वहीं यह गाली महागठबंधन के गले की फांस बन सकती है।
दरभंगा से उठा यह विवाद अब बिहार के हर जिले तक गूंजेगा। कांग्रेस नेता चाहे जितनी सफाई दें, बीजेपी इसे चुनावी हथियार बना चुकी है। बिहार की राजनीति में यह गाली अब गोलियों से भी ज्यादा असर दिखाने वाली है। और यह कहना गलत नहीं होगा कि चुनावी मौसम में नेताओं की जुबान ही कई बार पूरी बाजी पलट देती है।
बहरहाल सवाल यह है कि क्या यह "गाली" महागठबंधन को डुबो देगी, या कांग्रेस इस आग को बुझा पाएगी? लेकिन इतना तय है बिहार की राजनीति का तापमान अब और बढ़ेगा।