Patna Air Travel Alert: सावधान, हवाई सफर करने वालों पर आसमान में बज रही है खतरे की घंटी,हर दूसरा विमान तकनीकी खामी के साथ उड़ान पर , ये ग्रुप है सबसे आगे, रिपोर्ट जानकर डर जाएंगे आप

Patna Air Travel Alert: अगर आप बार-बार हवाई सफर करते हैं, तो यह खबर आपको चिंता में डाल सकती है।....

हवाई सफर करने वालों पर आसमान में बज रही है खतरे की घंटी- फोटो : social Media

Patna Air Travel Alert: अगर आप बार-बार हवाई सफर करते हैं, तो यह खबर आपको चिंता में डाल सकती है। भारत के आसमान में उड़ने वाले विमानों की तकनीकी सेहत को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में ऐसे आंकड़े पेश किए हैं, जिन्होंने यात्री सुरक्षा और एयरलाइंस के रखरखाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी डेटा के मुताबिक, देश में उड़ान भरने वाले हर दूसरे विमान में बार-बार तकनीकी खराबी सामने आ रही है।

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लिखित जवाब में बताया कि पिछले साल जनवरी से अब तक छह शेड्यूल्ड एयरलाइंस के 754 विमानों का विश्लेषण किया गया। इनमें से 377 विमानों में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं। यानी करीब 50 प्रतिशत बेड़ा तकनीकी दिक्कतों से जूझता रहा।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाले आंकड़े एयर इंडिया ग्रुप से जुड़े हैं। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के कुल 267 विमानों की जांच की गई, जिनमें से 191 विमानों में बार-बार खराबी दर्ज की गई। यह आंकड़ा जांचे गए बेड़े का लगभग 72 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, एयर इंडिया के 166 विमानों में से 137 और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 में तकनीकी समस्याएं सामने आईं।

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के सबसे ज्यादा विमानों की समीक्षा की गई। 3 फरवरी तक इंडिगो के 405 विमानों का विश्लेषण हुआ, जिनमें से 148 विमानों में बार-बार खामी पाई गई। इसके अलावा स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 और अकासा एयर के 32 विमानों में से 14 विमानों में भी तकनीकी दिक्कतें दर्ज की गईं।

हालांकि, एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि ये समस्याएं ज़्यादातर कम प्राथमिकता वाली थीं। विमान प्रणालियों को A से D श्रेणियों में बांटा जाता है और एयर इंडिया की अधिकतर खामियां श्रेणी D से जुड़ी थीं, जिनमें सीट, ट्रे टेबल और सीट-बैक स्क्रीन जैसी चीजें शामिल हैं। अधिकारी के मुताबिक, ये उड़ान सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि विमानन नियामक ने निगरानी कड़ी करते हुए 874 स्पॉट चेक, 550 नाइट इंस्पेक्शन, 3,890 सर्विलांस इंस्पेक्शन और 492 रैंप इंस्पेक्शन किए। स्टाफ की कमी को देखते हुए तकनीकी पदों की संख्या भी बढ़ाई गई है।

इन आंकड़ों ने भले ही नियामकीय सतर्कता को दिखाया हो, लेकिन यात्रियों के मन में यह सवाल जरूर छोड़ दिया है क्या भारतीय आसमान सच में उतना सुरक्षित है, जितना दिखाया जाता है?