वीआआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी को लखनऊ में नजरबंदी के आदेश के खिलाफ याचिका, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
Patna/ Lucknow : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक द्वारा 28 जून 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है। कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संस्थापक मुकेश सहनी को लखनऊ स्थित उनके आवास पर रोक दिया गया था, जिसके खिलाफ यह कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता और सरकारी वकील के बीच पक्ष-विपक्ष की दलीलें
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राकेश नायक ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को 28 जून से 30 जून 2026 तक उनके लखनऊ स्थित घर पर नजरबंद रखा गया, लेकिन इस कार्रवाई का कोई स्पष्ट और ठोस कारण नहीं बताया गया था। इसके विपरीत, राज्य सरकार के अधिवक्ता विपुल कुमार सिंह ने दलील दी कि 28 जून को जारी किए गए पत्र में याचिकाकर्ता को रोके जाने का कारण स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र पर कोर्ट ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत का ध्यान याचिका के साथ संलग्न एनेक्शर संख्या-9 की ओर आकर्षित किया। यह पत्र भारत सरकार के गृह मंत्रालय के एक अवर सचिव की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेजा गया था, जिसमें 30 जून 2026 को दिए गए आवेदन के आधार पर रोकने के आदेश का कारण बताए जाने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने राज्य के वकील से पूछा कि 24 जुलाई 2026 के इस केंद्रीय पत्र के बाद सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की गई है।
विशेष निर्देश के लिए समय की मांग, 16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
राज्य के अधिवक्ता विपुल कुमार सिंह ने इस संबंध में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए अदालत से कुछ समय का अनुरोध किया। अदालत ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। साथ ही, मामले को उस दिन नए मामले के रूप में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। यह पूरा मामला सीआरएलपी संख्या 8912/2026 के रूप में दर्ज है।
देवांशु प्रभात की रिपोर्ट