मोकामा विधायक अनंत सिंह के फंड संकट वाले बयान से मचा घमासान,खजाना खाली या सियासी सफाई? सरकार बोली– पैसे की कोई कमी नहीं, विपक्ष ने पूछा– विकास आखिर रुका क्यों?

जदयू विधायक अनंत सिंह के उस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि "बिहार में फंड की कमी है, विधायक निधि का पैसा नहीं मिल रहा है और ठेकेदार रो रहे हैं।" ...

मोकामा विधायक अनंत सिंह के फंड संकट वाले बयान से मचा घमासान- फोटो : reporter

Bihar Fund Crisis:  बिहार में विकास योजनाओं की रफ्तार और सरकारी खजाने की हालत को लेकर सियासी जंग तेज हो गई है। जदयू विधायक अनंत सिंह के उस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि "बिहार में फंड की कमी है, विधायक निधि का पैसा नहीं मिल रहा है और ठेकेदार रो रहे हैं।" उनके इस बयान के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया है। राजद समेत विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि सरकार ने विधायकों के हाथ-पैर काट दिए हैं, ऐसे में जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में विकास कार्य और जनता की सेवा कैसे करेंगे।

हालांकि, राज्य सरकार इन आरोपों को पहले हीं खारिज कर चुकी है। उपमुख्यमंत्री  बिजेंद्र प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पहले हीं कहा था कि बिहार के खजाने में पैसों की कोई किल्लत नहीं है। सरकार के मुताबिक विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है। सरकार ने विपक्ष के खजाना खाली वाले आरोप को सियासी प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा कि कर्ज लेना और उसका भुगतान करना सामान्य वित्तीय प्रक्रिया है, जिसे हर राज्य अपनाता है।

दूसरी ओर, वित्त विभाग के बजट आवंटन और महालेखाकार  के अंतरिम आंकड़े कई सवाल भी खड़े कर रहे हैं। अप्रैल 2026 से 5 जुलाई तक बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सिर्फ 410.78 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि इससे पहले जनवरी से मार्च के बीच 813.14 करोड़ रुपये जारी हुए थे। इतना ही नहीं, पिछले 35 दिनों में किसी नई राशि के आवंटन की जानकारी नहीं है, जिससे 11 बड़ी परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त पड़ने की बात सामने आई है।

महालेखाकार की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में पूंजीगत निवेश लक्ष्य का केवल 87.14 प्रतिशत ही खर्च हुआ, जबकि 2024-25 में यह 125.43 प्रतिशत था। वहीं सब्सिडी पर वास्तविक खर्च बजट अनुमान के मुकाबले 164.32 प्रतिशत तक पहुंच गया। इन आंकड़ों के आधार पर विपक्ष का आरोप है कि विकास का पैसा सब्सिडी की तरफ हस्तांतरण कर दिया गया, जिसकी वजह से सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल और अन्य आधारभूत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।

फिलहाल बिहार की सियासत में असली सवाल यही है कि यदि सरकार के दावे के मुताबिक खजाना भरा हुआ है, तो विधायक निधि, विकास योजनाओं और ठेकेदारों की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। वहीं सरकार का कहना है कि विपक्ष अधूरे तथ्यों के सहारे भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में छोटे सरकार का कहना कि  बिहार में फंड की कमी है । उन्हें विधायक वाला फंड नहीं मिल रहा है । सभी ठेकेदार रो रहे हैं ।... सरकार के दावे की पोल खोलने के लिए काफी नहीं हैं, क्या?

रिपोर्ट- देवांशु प्रभात