फिर से पशुपति पारस की शरण में आए बाहुबली सूरजभान सिंह, चुनावी हार ने दोनों का बदला सियासी समीकरण, मकर संक्रांति से नई शुरुआत

विधानसभा चुनाव के दौरान सूरजभान सिंह ने पशुपति पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का दामन थाम लिया था। अब फिर से दोनों साथ आये हैं.

Suraj Bhan Singh-Pashupati Paras - फोटो : news4nation

Suraj Bhan Singh:  बिहार की राजनीति में एक बार फिर पुराने साथी साथ नजर आए हैं। बाहुबली नेता सूरजभान सिंह गुरुवार को मकर संक्रांति के मौके पर पशुपति पारस के आवास पहुंचे, जहां दही-चूड़ा भोज में उन्होंने शिरकत की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब हालिया बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सियासी समीकरणों में तेज़ बदलाव देखने को मिल रहे हैं।


गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के दौरान सूरजभान सिंह ने पशुपति पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का दामन थाम लिया था। मोकामा से उनकी पत्नी वीणा देवी राजद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरी थीं, लेकिन उन्हें जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह से हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बाद अब सूरजभान सिंह की सियासी चाल बदली हुई नजर आ रही है और वे एक बार फिर पशुपति पारस के साथ दिखाई दिए हैं।


पशुपति पारस की पार्टी रालोजपा ने विधानसभा चुनाव में अकेले दम पर चुनाव लड़ा था, हालांकि पार्टी का कोई भी उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सका। चुनाव में मिली करारी हार के बाद पशुपति पारस और सूरजभान सिंह का फिर से साथ आना राजनीतिक गलियारों में कई अटकलों को जन्म दे रहा है।


हालांकि सूरजभान सिंह और पशुपति पारस की नजदीकियां नई नहीं हैं। जब रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) का गठन किया था, तब सूरजभान सिंह उनके सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव के बाद लोजपा में नेतृत्व को लेकर खींचतान शुरू हुई। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार मिली और रामविलास पासवान के निधन के बाद लोजपा दो गुटों में बंट गई।


एक तरफ चिराग पासवान लोजपा (रामविलास) के साथ आगे बढ़े, तो दूसरी ओर पशुपति पारस, प्रिंस पासवान, सूरजभान सिंह के भाई चंदन सिंह समेत कई सांसद अलग गुट में चले गए। पशुपति पारस को केंद्र में मंत्री पद भी मिला, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में एनडीए ने उन्हें कोई सीट नहीं दी। वहीं चिराग पासवान का कद एनडीए में और मजबूत हुआ। अब, चुनावी झटकों के बाद सूरजभान सिंह और पशुपति पारस का फिर से एक मंच पर दिखना बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।


अभिजीत की रिपोर्ट