बांकीपुर की जीत के बाद पटना की हार! कूड़े के पहाड़, हर गली में बदबू, हर घर में संक्रमण का डर, सवालों में सरकार

Patna Municipal Strike: चुनावी शोर थम गया, हार-जीत का फैसला भी हो गया, लेकिन राजधानी की सड़कों पर अब एक दूसरी जंग जारी है-कचरे, बदबू और संक्रमण के खिलाफ। ...

चुनाव खत्म होते हीं गंदगी और इनफेक्शन के घेराबंदी में राजधानी- फोटो : social Media

Patna Municipal Strike: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बंपर जीत दर्ज कर सियासी समीकरण बदल दिए। चुनावी शोर थम गया, हार-जीत का फैसला भी हो गया, लेकिन राजधानी की सड़कों पर अब एक दूसरी जंग जारी है-कचरे, बदबू और संक्रमण के खिलाफ। नगर निगम कर्मियों की हड़ताल का आज सातवां दिन है और शहर का बड़ा हिस्सा गंदगी के बोझ तले कराह रहा है।

बांकीपुर अंचल के पोस्टल पार्क, हनुमान नगर, गर्दनीबाग, अशोक नगर, बोरिंग रोड, नेहरू नगर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, एस.के. नगर, किदवईपुरी और अनीसाबाद पुलिस कॉलोनी जैसे इलाकों में कचरे के ढेर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। दूसरी ओर आईएमए हॉल, राजीव नगर, एजी कॉलोनी, जनक किशोर पथ, ठाकुरबाड़ी रोड, पाटलिपुत्र पार्क, न्यू सचिवालय, नया टोला और मछुआ टोली भी गंदगी की गिरफ्त में हैं। चुनाव तो बीत गया सफाई कब होगी? लोग सवाल कर रहे हैं कि नगर निगम क्या इलाका देख कर कचड़ा का उठाव कर रहा है। आखिर बांकीपुर इलाके से कच़ड़ा का उठाव क्यों नहीं हो रहा है।  

पुलिस सुरक्षा में 26 क्लोज टिपर वाहन शहर में उतारे गए हैं, लेकिन  बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के पोस्टल पार्क, हनुमान नगर, गर्दनीबाग, अशोक नगर, बोरिंग रोड, नेहरू नगर, पाटलिपुत्र कॉलोनी, एस.के. नगर, किदवईपुरी में कचड़े का ढ़ेर लगने से लोग इनफेक्शन के शिकार हो रहे हैं, बदबू की तो बात करनी ही बेमानी है ।

 अनुमान है कि चार दिनों में ही शहर में करीब 4,800 टन कचरा जमा हो चुका है। मानसून की बारिश ने हालात को और बिगाड़ दिया है। सड़ता कचरा, उठती दुर्गंध और जगह-जगह जलभराव ने संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा दिया है।

अब इसका असर अस्पतालों में भी दिखाई देने लगा है। पीएमसीएच, आईजीआईएमएस और न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल समेत कई सरकारी और निजी अस्पतालों के ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पतालों के अनुसार ओपीडी में करीब 10 प्रतिशत मरीज बढ़े हैं। पीएमसीएच के श्वसन रोग विभाग में रोज़ाना 300 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि चर्म रोग विभाग में गंदगी और मच्छरों से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं।

यह स्थिति केवल सफाई व्यवस्था का संकट नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का उभरता खतरा बन चुकी है। चुनावी रण खत्म हो चुका है, लेकिन अब राजधानी को संक्रमण के खतरे से बचाने की चुनौती सामने है। जनता चाहे बांकीपुर की हो, दीघा की हो या पटना के किसी भी मोहल्ले की उसे फिलहाल सियासी बयान नहीं, साफ सड़कें, उठता कचरा और सुरक्षित माहौल चाहिए। बरसात के इस मौसम में यदि जल्द प्रभावी समाधान नहीं निकला, तो गंदगी की यह घेराबंदी एक बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। सुनिए सरकार