Bihar Politics: बिहार की सियासत में नया बवाल, निर्दलीय MLC के BJP में शामिल होने पर भड़के भाई वीरेंद्र, बोले- सदस्यता होनी चाहिए खत्म
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में भाजपा और जदयू के बीच चल रही सियासी खींचतान अब एक नए विवाद में तब्दील होती दिख रही है।...
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में भाजपा और जदयू के बीच चल रही सियासी खींचतान अब एक नए विवाद में तब्दील होती दिख रही है। निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे ने विपक्ष को भी सरकार और एनडीए पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। राजद के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई वीरेंद्र ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दोनों विधान पार्षदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग कर दी है। उनके बयान से बिहार विधान परिषद की राजनीति में नया सियासी संग्राम छिड़ने के आसार हैं।
दो निर्दलीय MLC की भाजपा में एंट्री पर विवाद
दरअसल, शनिवार को तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी राहुल राज के भाजपा की सदस्यता लेने की खबर सामने आई थी। इस घटनाक्रम के बाद एनडीए के भीतर भी सियासी हलचल तेज हो गई।हालांकि, विवाद तब और गहरा गया, जब बंशीधर ब्रजवासी ने देर रात वीडियो जारी कर भाजपा में शामिल होने की खबरों का खंडन कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मुख्यमंत्री से मिलने गए थे, भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने नहीं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
भाई वीरेंद्र का हमला, सभापति से सदस्यता खत्म करने की मांग
इस पूरे मामले पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि निर्दलीय चुनाव जीतकर आए दोनों विधान पार्षदों की सदस्यता समाप्त होनी चाहिए। इस संबंध में वे विधान परिषद के सभापति से मांग करेंगे।भाई वीरेंद्र ने चुनावी जनादेश का हवाला देते हुए कहा कि इन नेताओं ने चुनाव के दौरान जनता से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वोट मांगा था। मतदाताओं ने भी उन्हें उसी हैसियत से अपना समर्थन दिया था। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक दल में शामिल होने का मामला गंभीर है।उन्होंने कहा कि अगर सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई होती है तो सभी संबंधित सदस्यों के मामले में समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। किसी एक के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग नियम नहीं चलना चाहिए।
NDA की अंदरूनी कलह को विपक्ष ने बनाया सियासी हथियार
भाजपा में निर्दलीय विधान पार्षदों के शामिल होने की खबर और बंशीधर ब्रजवासी के इनकार ने एनडीए की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले जदयू ने राहुल राज की भाजपा में वापसी पर सवाल उठाए और अब राजद ने सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाकर सियासी दबाव बढ़ा दिया है।
अब सभापति के फैसले पर टिकी निगाहें
इस विवाद में अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या निर्दलीय निर्वाचित विधान पार्षदों के राजनीतिक दल में शामिल होने से उनकी सदस्यता पर कोई कानूनी प्रभाव पड़ेगा? क्या भाई वीरेंद्र की मांग पर विधान परिषद के सभापति कोई कदम उठाएंगे? फिलहाल इस संबंध में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। लेकिन इतना तय है कि निर्दलीय एमएलसी की सदस्यता का मुद्दा बिहार की सियासत में नया राजनीतिक अखाड़ा बन गया है।
रिपोर्ट- रंजन कुमार सिंह