Bihar Politics:भाजपा में शामिल निर्दलीय MLC की सदस्यता रद्द करने की मांग, जन सुराज ने सभापति को सौंपे सबूत

Bihar Politics: बिहार की सियासत में दल-बदल को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ...

Jan Suraaj
भाजपा में शामिल निर्दलीय MLC की सदस्यता रद्द करने की मांग- फोटो : reporter

Bihar Politics: बिहार की सियासत में दल-बदल को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए दो निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों (MLC) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जन सुराज की ओर से बिहार विधान परिषद पहुंचकर सभापति के समक्ष दोनों सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई गई है। पार्टी ने इस संबंध में लिखित शिकायत सौंपने के साथ अपने दावे के समर्थन में कई साक्ष्य और दस्तावेज भी पेश किए हैं।जन सुराज का आरोप है कि दोनों निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों का भाजपा में शामिल होना दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के विपरीत है। पार्टी ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा है कि निर्दलीय निर्वाचित सदस्य किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकता। ऐसा करने पर उसकी सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान लागू हो सकता है।

सभापति रामबचन राय के समक्ष उठाया मामला

इस पूरे विवाद को लेकर जन सुराज के नेता बिहार विधान परिषद के सभापति रामबचन राय के पास पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें लिखित शिकायत सौंपते हुए दोनों निर्दलीय एमएलसी के भाजपा में शामिल होने से जुड़े साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। पार्टी ने सभापति से पूरे मामले की संवैधानिक प्रावधानों के तहत जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।वहीं, जब इस मामले पर विधान परिषद के सभापति रामबचन राय से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की। ऐसे में अब इस शिकायत पर सभापति की ओर से होने वाली कार्रवाई पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं।

नोटिस जारी कर जवाब मांगने की मांग

जन सुराज के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि पार्टी ने दोनों विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज करा दी है। उन्होंने बताया कि सभापति से आग्रह किया गया है कि संबंधित सदस्यों को नोटिस जारी कर उनसे पूछा जाए कि वे किस आधार पर भाजपा में शामिल हुए हैं।किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि पार्टी की मांग है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत मामले की जांच कर दोनों सदस्यों की सदस्यता रद्द की जाए। उन्होंने दावा किया कि सभापति ने पूरे मामले में जल्द कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

दल-बदल कानून के तहत सदस्यता पर सवाल

संविधान की दसवीं अनुसूची में निर्दलीय निर्वाचित सदस्यों के राजनीतिक दल में शामिल होने को लेकर अयोग्यता का प्रावधान है। इसके तहत कोई निर्दलीय सदस्य सदन का सदस्य निर्वाचित होने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो वह अयोग्य ठहराया जा सकता है। हालांकि, किसी सदस्य के खिलाफ अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और तथ्यों की जांच के बाद ही लिया जाता है।

फिलहाल जन सुराज ने इस मामले को लेकर सभापति के समक्ष अपनी कानूनी और राजनीतिक चुनौती पेश कर दी है। अब देखना होगा कि बिहार विधान परिषद के सभापति इस शिकायत पर कब तक सुनवाई शुरू करते हैं और दोनों निर्दलीय एमएलसी की सदस्यता को लेकर क्या फैसला लेते हैं।

रिपोर्ट- रंजन कुमार सिंह