भरत तिवारी एनकाउंटर : नौकरी और मुआवजा राशि के सवाल पर DGP का बड़ा बयान, कहा– "न्यायिक जांच जारी"
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और सहायता राशि दिए जाने के सवाल पर DGP ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि अभी पूरे मामले की न्यायिक जांच चल रही है....
Arrah : भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और सहायता राशि दिए जाने के सवाल पर बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने स्थिति स्पष्ट की है। DGP ने बताया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) चल रही है। उन्होंने कहा कि जिस पुलिसकर्मी द्वारा जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया गया था, उसे पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मामले में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
"पुलिस को भी है आत्मरक्षा में गोली चलाने का अधिकार"
DGP ने पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि कानून के तहत पुलिस बल को भी अपनी आत्मरक्षा (Self Defense) का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब परिस्थितियां अत्यंत विकट और अनियंत्रित हो जाती हैं, तो पुलिस अपनी जान की रक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यकतानुसार कदम उठाने और फायरिंग करने के लिए बाध्य होती है।
बल प्रयोग की प्रक्रिया: चेतावनी से लेकर लाठीचार्ज तक
कानून-व्यवस्था के कड़े नियमों का उल्लेख करते हुए DGP ने कहा कि किसी भी उग्र स्थिति में पुलिस सबसे पहले उपद्रवियों को चेतावनी देती है। चेतावनी के बेअसर होने पर आंसू गैस के गोलों का प्रयोग किया जाता है और यदि स्थिति फिर भी नियंत्रण में न आए तो लाठीचार्ज की नौबत आती है। आगजनी, पथराव और हिंसक प्रदर्शन जैसी गंभीर परिस्थितियों में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को अनुपातिक बल प्रयोग करना पड़ता है।
"जनता की सुरक्षा के लिए कई बार खुद जख्म सहते हैं जवान"
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन अंतिम क्षणों तक संयम और धैर्य बनाए रखने की कोशिश करता है, जब तक कि हालात सुधरने की थोड़ी भी गुंजाइश बाकी रहती है। हालांकि, जब उपद्रवी कानून को हाथ में लेने लगते हैं, तब आम नागरिकों की जीवन-रक्षक सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाते हैं। DGP ने भावुक अपील करते हुए कहा कि पुलिसकर्मी भी इसी समाज के नागरिक हैं और कई बार वे खुद गंभीर चोटें और जख्म सहकर भी आम जनता की रक्षा में मुस्तैद रहते हैं।
अनिल की रिपोर्ट