Bihar Politics : लालू-तेजस्वी के करीबी भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने की नितिन नबीन से मुलाकात; बिहार में सियासी अटकलें तेज, क्या बदलेंगे पाला?

Bihar Politics : भोजपुरी गायक और कलाकार खेसारीलाल यादव ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की. जिसके बाद सियासी अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया है.

नितिन नबीन से मिले खेसारी - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : भोजपुरी सिनेमा के ट्रेंडिंग स्टार और गायक खेसारी लाल यादव की एक मुलाकात ने बिहार के सियासी गलियारों में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के बेहद मुखर समर्थक और पूर्व प्रत्याशी रहे खेसारी लाल यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की है। इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद से ही कयासों का बाजार गर्म है और चर्चा है कि क्या खेसारी लाल अब 'लालटेन' का साथ छोड़कर 'कमल' थामने की तैयारी में हैं।

यह मुलाकात इसलिए भी राजनीतिक पंडितों को चौंका रही है क्योंकि खेसारी लाल यादव को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता रहा है। वे सार्वजनिक मंचों से कई बार आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को अपने पिता के समान बता चुके हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टिकट पर खेसारी लाल यादव छपरा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में भी उतर चुके हैं। ऐसे में अचानक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से उनकी मुलाकात नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर रही है।

खेसारी लाल यादव का आरजेडी से जुड़ाव सिर्फ चुनावी उम्मीदवार बनने तक सीमित नहीं रहा है; वे पिछले कई चुनावों में पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में लालू-तेजस्वी के लिए वोट मांगते नजर आते रहे हैं। अपनी इसी करीबी और राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें धुर बीजेपी विरोधी चेहरों में गिना जाता था। लेकिन नितिन नबीन से हुई इस शिष्टाचार मुलाकात ने राजनीतिक पंडितों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के अन्य सितारों (जैसे मनोज तिवारी, रवि किशन, दिनेश लाल यादव निरहुआ और पवन सिंह) की तरह खेसारी भी अब भगवा रंग में रंगने वाले हैं।

हालांकि, इस मुलाकात को लेकर अभी तक खेसारी लाल यादव या बीजेपी नेता नितिन नबीन की तरफ से कोई आधिकारिक राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है। खेसारी के करीबियों का कहना है कि यह एक शिष्टाचार या औपचारिक मुलाकात भी हो सकती है। लेकिन राजनीति में बिना किसी ठोस वजह के ऐसी मुलाकातों के मायने नहीं निकाले जाते, खासकर तब जब हाल ही में बीजेपी के अन्य बड़े नेताओं (जैसे मनोज तिवारी) द्वारा खेसारी को बीजेपी में आने के खुले ऑफर्स भी दिए जाने की चर्चाएं रही हैं।

फिलहाल, इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया से लेकर पटना के सियासी हलकों तक सिर्फ एक ही सवाल तैर रहा है कि क्या खेसारी लाल यादव का आरजेडी से मोहभंग हो चुका है? यदि वे आने वाले समय में बीजेपी का दामन थामते हैं, तो यह उत्तर बिहार और खासकर सारण (छपरा) के इलाके में आरजेडी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें खेसारी लाल यादव के अगले कदम और उनके आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं।