भूमिहार जाति को नीतीश सरकार ने दिया बड़ा तोहफा, बिहार विधानसभा में हुआ ऐलान, जानिए खुशखबरी
भूमिहार या भूमिहार ब्राह्मण यह एक ऐसा विवाद है जिसे लेकर अब नीतीश सरकार ने बिहार विधानसभा में बड़ा ऐलान किया है.
Bhumihar : बिहार के भूमिहारों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है. सरकारी दस्तावेजों में जाति के कॉलम में भूमिहार होगा या भूमिहार ब्राह्मण इसे लेकर राजस्व भूमि सुधार विभाग के मंत्री ने गुरुवार को विधान सभा में बड़ा ऐलान किया. इसमें घोषणा की गई कि राजस्व भूमि सुधार विभाग के अभिलेख में पहले की तरह भूमिहार ब्राह्मण लिखा रहेगा। इसमें किसी तरह का कोई सुधार नहीं किया जाएगा। मंत्री विजय सिन्हा ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसका निर्देश दे दिया गया है।
दरअसल शून्य काल में अतरी विधायक रोमित कुमार ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था की 1931 के जनगणना में भूमिहार ब्राह्मण की आवादी 9 लाख दर्ज थी । लेकिन 2023 में हुई जातीय आधारित गणना में शामिल 215 जातियों की सूची में इस जाति (भूमिहार ब्राह्मण) का नाम हटा दिया गया। इसका कहीं कोई जिक्र नहीं था। उनके इस सवाल पर विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया कि अभिलेख में पहले की तरह भूमिहार ब्राह्मण ही लिखा रहेगा।
विवाद की जड़ क्या है?
जाति गणना के डेटा में समुदाय का नाम “भूमिहार” दर्ज किया गया है, जबकि भूमिहार समाज के एक बड़े हिस्से का कहना है कि उनकी ऐतिहासिक-सामाजिक पहचान “भूमिहार ब्राह्मण” के रूप में रही है। इसी नाम को सरकारी दस्तावेज़ों में दर्ज किए जाने की मांग की जा रही है।
भूमिहार समाज की आपत्ति
समाज का तर्क है कि केवल “भूमिहार” लिखने से उनकी ब्राह्मण पहचान मिट जाती है। उनका कहना है कि इससे सामाजिक दर्जा, परंपरा और पहचान पर असर पड़ता है। कुछ संगठनों ने इसे पहचान से वंचित करने जैसा बताया है। भूमिहार वर्ग के लोगों ने आरोप लगाया कि जाति गणना को जल्दबाजी में जारी किया गया और संवेदनशील जातीय पहचानों को नजरअंदाज किया गया।
रंजन की रिपोर्ट