भारतीय रेल का बड़ा बदलाव : अब ट्रेनों के टॉयलेट से विदा होंगे 'चेन वाले मग' रेलवे ने की दूसरी व्यवस्था
भारतीय रेल में दशकों से चली आ रही 'चेन से बंधे मग' की व्यवस्था अब इतिहास बनने जा रही है। रेलवे ने स्वच्छता और यात्री सुविधाओं को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
Patna - भारतीय ट्रेनों के टॉयलेट में सालों से नजर आने वाले स्टील के मग और उन्हें बांधने वाली लोहे की जंजीरें अब बीते जमाने की बात होने वाली हैं। रेलवे मंत्रालय ने एसी कोचों में स्वच्छता के स्तर को सुधारने और यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए पुरानी मग व्यवस्था को हटाकर आधुनिक जेट स्प्रे (Jet Spray) लगाने का निर्णय लिया है। यह बदलाव न केवल आधुनिकता का प्रतीक है, बल्कि कोचों के रख-रखाव में भी क्रांतिकारी साबित हो रहा है।
नल से मग और अब जेट स्प्रे तक का सफर
शुरुआती दौर में भारतीय ट्रेनों के टॉयलेट में केवल एक साधारण नल होता था। बाद में सुविधाओं में इजाफा करते हुए एसी कोचों में स्टील के मग दिए गए। हालांकि, मग चोरी होने की लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण रेलवे को इन्हें जंजीरों से बांधना पड़ा। यह 'चेन और मग' की व्यवस्था सालों तक भारतीय रेल की पहचान बनी रही, लेकिन अब तकनीक और यात्री फीडबैक के आधार पर रेलवे ने इस पुरानी पद्धति को बदलने का मन बना लिया है।
ट्रायल के सुखद परिणाम: फर्श रहेगा सूखा और साफ
नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उत्तर रेलवे (Northern Railway) में इसका कड़ा परीक्षण किया गया। दिल्ली और अंबाला मंडलों ने शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों में जेट स्प्रे लगाकर ट्रायल किया। इस दौरान फर्श के पास लगे नलों को डमी प्लग से बंद कर दिया गया और मग हटा दिए गए। ट्रायल के नतीजों में पाया गया कि टॉयलेट का फर्श पहले की तुलना में अधिक सूखा और साफ रहने लगा है, जिससे फिसलन और जलभराव की शिकायतों में भारी कमी आई है।
रेल मंत्रालय की 'पायलट प्रोजेक्ट' योजना
सफल ट्रायल के बाद, रेल मंत्रालय ने अब इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बनाई है। सभी रेलवे जोनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी चुनी हुई 10 प्रमुख ट्रेनों के एसी कोचों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करें। रेलवे ने अगले 3 महीनों के भीतर इस नई व्यवस्था पर प्रदर्शन रिपोर्ट और यात्रियों का फीडबैक मांगा है। उत्तर रेलवे ने पहले ही जानकारी दी है कि 182 शताब्दी कोचों में जेट स्प्रे लगाए जा चुके हैं।
सफाई के मानकों में सुधार और यात्रियों को राहत
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस छोटे से दिखने वाले बदलाव का असर बहुत बड़ा होगा। जेट स्प्रे लगने से पानी की बर्बादी कम होगी और टॉयलेट में कीचड़ या पानी जमा होने की समस्या खत्म हो जाएगी। इससे न केवल सफाई के मानक बेहतर होंगे, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अधिक हाइजीनिक और सुविधाजनक माहौल मिलेगा।