Supreme Court: राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे फ्री स्कीम पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, खैरात नहीं रोजगार दो, जमकर सुनाया

Supreme Court: गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राज्य सरकारें कर्ज में होने के बावजूद मुफ्त सुविधाएं देती रहेंगी तो इन योजनाओं का खर्च आखिर करदाता के अलावा कौन उठाएगा?

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

Supreme Court: बिहार सहित कई राज्यों में फ्री स्कीम चलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लताड़ा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्यों को फटकारते हुए कहा कि आप अपने राज्य की जनता को रोजगार दें खैरात नहीं। दरअसल, मुफ्त योजनाएं (फ्रीबीज) बांटे जाने पर कड़ी टिप्पणी की है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राज्य सरकारें कर्ज में होने के बावजूद मुफ्त सुविधाएं देती रहेंगी तो इन योजनाओं का खर्च आखिर करदाता के अलावा कौन उठाएगा?

सीधे कैश ट्रांसफर 

सीजेआई ने कहा कि पहले मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली जैसी योजनाएं थीं, लेकिन अब सीधे कैश ट्रांसफर भी किए जा रहे हैं। अदालत ने इस प्रवृत्ति की वित्तीय समझदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारों को मुफ्त सुविधाएं बांटने के बजाय रोजगार सृजन पर ध्यान देना चाहिए।

विकास खर्च में कमी पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि कई राज्य राजस्व घाटे का सामना कर रहे हैं, इसके बावजूद कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। कर्मचारियों के वेतन और मुफ्त योजनाओं का बोझ इतना बढ़ गया है कि विकास कार्यों के लिए जरूरी फंड प्रभावित हो रहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि एक वर्ष में जुटाए गए राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा विकास कार्यों में लगाया जाए, तो बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम मामले में सुनवाई

यह टिप्पणी तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम बिहार सरकार मामले की सुनवाई के दौरान की गई। कोर्ट ने निगम को उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति का आकलन किए बिना सार्वभौमिक रूप से मुफ्त बिजली देने के वादे पर फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुफ्त की सेवाओं’ की संस्कृति की आलोचना करते हुए कहा कि यह दीर्घकालिक आर्थिक विकास में बाधा बन सकती है। अदालत की इन टिप्पणियों को राज्यों की वित्तीय नीतियों पर महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।