Bihar Vidhanmandal Winter Session: बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से, 5 दिन तक सदन में गरमाएगी सियासत
Bihar Vidhanmandal Winter Session: बिहार की सम्राट चौधरी सरकार के लिए नवंबर का आखिरी दिन सियासी लिहाज से अहम होने जा रहा है।
Bihar Vidhanmandal Winter Session: बिहार की सम्राट चौधरी सरकार के लिए नवंबर का आखिरी दिन सियासी लिहाज से अहम होने जा रहा है। बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगा। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई। पांच दिनों के इस सत्र में विधानसभा और विधान परिषद की कुल पांच बैठकें होंगी। इस दौरान सरकार विधायी कार्यों को आगे बढ़ाएगी, वहीं विपक्ष को जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने का मौका मिलेगा।
पांच दिनों तक सदन में होगी चर्चा
बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुक्रवार तक चलेगा। पांच दिवसीय सत्र के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ विधेयकों और अन्य सरकारी कार्यों को सदन के पटल पर रखा जा सकता है।सत्र के दौरान राज्य की विकास योजनाओं, सरकारी नीतियों और जनता से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार की प्राथमिकताओं और कामकाज को लेकर भी सदन में सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले विधेयकों और कार्यसूची का विस्तृत ब्योरा सामने आने के बाद ही एजेंडे की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
सम्राट चौधरी सरकार के लिए अहम सत्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए यह सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदन में सरकार को अपनी योजनाओं और नीतियों का पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। वहीं, विपक्ष महंगाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार से जवाब मांग सकता है।सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में सदन की कार्यवाही पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
विधान परिषद चुनाव के बाद दिखेंगे नए चेहरे
हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधान परिषद चुनाव के बाद सदन में कुछ नए चेहरे भी नजर आएंगे। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कई मौजूदा विधान पार्षदों को हार का सामना करना पड़ा, जबकि नए उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इन चुनाव परिणामों के बाद विधान परिषद की चर्चाओं में नए प्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।नए निर्वाचित सदस्यों के सामने अपने मतदाताओं की समस्याओं को सदन में उठाने और संबंधित मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने का अवसर होगा।
जुलाई में हुआ था पांच दिवसीय मानसून सत्र
इससे पहले बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र 20 से 24 जुलाई तक चला था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए उस सत्र में कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए थे। विपक्ष ने सरकार की नीतियों और विभिन्न मामलों को लेकर विरोध दर्ज कराया था।
अब नवंबर में होने वाला शीतकालीन सत्र भी सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अहम रहने वाला है। पांच दिनों की कार्यवाही में किन मुद्दों पर सबसे अधिक बहस होती है और सरकार विपक्ष के सवालों का किस तरह जवाब देती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।