Bankipur by-election: क्या बांकीपुर में दिखेगा CJP आंदोलन का असर? नतीजों पर टिकी विपक्ष की नजर, जानें कैसे?
Bankipur by-election: CJP आंदोलन के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को भाजपा, राजद और जन सुराज के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानिए पूरा राजनीतिक समीकरण।
Bankipur by-election: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 36 दिनों तक चला आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। आंदोलन खत्म होने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। कई लोग मान रहे हैं कि आंदोलन के दौरान सरकार को आंदोलनकारियों की मांगें माननी पड़ीं, जिससे यह एक बड़ी राजनीतिक घटना बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की राय सामने आ रही है। एक पक्ष का मानना है कि यह भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती की शुरुआत हो सकती है। वहीं, विपक्षी दल इसे अपनी राजनीतिक सोच के समर्थन के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इन दावों की वास्तविक स्थिति आने वाले चुनावी नतीजों से ही साफ होगी।
इसी बीच बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है। चुनाव मैदान में कुल 25 उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जन सुराज के उम्मीदवारों के बीच माना जा रहा है। भाजपा ने इस सीट से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। राजद ने रेखा कुमारी को मैदान में उतारा है, जबकि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी चुनाव लड़ रहे हैं।
क्यों खाली हुई बांकीपुर सीट?
बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई थी। नितिन नवीन लगातार पांच बार इस सीट से विधायक चुने गए थे। इसी वजह से भाजपा को उम्मीद है कि वह इस सीट को फिर से जीत लेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CJP आंदोलन के बाद मतदाताओं के रुख को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि आंदोलन के कारण भाजपा समर्थकों का मनोबल प्रभावित हुआ है, जबकि कुछ लोग इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं। इसका वास्तविक असर चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
राजद की उम्मीदवार रेखा कुमारी को मिला था मौका
पिछले विधानसभा चुनाव में भी राजद की उम्मीदवार रेखा कुमारी इसी सीट से चुनाव मैदान में थीं। उन्हें 46,363 वोट मिले थे और वह दूसरे स्थान पर रही थीं। भाजपा के नितिन नवीन को 98,299 वोट मिले थे और उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की थी। वहीं, जन सुराज के उम्मीदवार को लगभग 7,700 वोट मिले थे। भाजपा को भरोसा है कि इस सीट पर उसकी मजबूत पकड़ बनी हुई है। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर का मानना है कि उनकी राजनीति और मुद्दों पर आधारित प्रचार लोगों को आकर्षित करेगा। उन्होंने पूरे चुनाव प्रचार में खुद ही प्रमुख प्रचारक की भूमिका निभाई है।
जन सुराज का मु्द्दा
जन सुराज लगातार शिक्षा, रोजगार और युवाओं के मुद्दों को उठाती रही है। पार्टी जाति और धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करने की बात करती है। दूसरी ओर, राजद अपने पारंपरिक वोट बैंक और संगठन के दम पर चुनाव लड़ रही है। CJP आंदोलन का असर बिहार के कई जिलों में भी देखने को मिला था। दरभंगा, सीवान, छपरा, भोजपुर और अन्य जिलों में छात्रों ने विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। इससे विपक्षी दलों को यह उम्मीद मिली कि युवाओं के बीच बदलाव की भावना बढ़ रही है।
बांकीपुर उपचुनाव का महत्वपूर्ण
हालांकि, यह भी सच है कि पिछले चुनाव में जन सुराज को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी, इसलिए बांकीपुर उपचुनाव को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेतक माना जा रहा है। इस चुनाव के नतीजे यह बताने में मदद कर सकते हैं कि मतदाताओं के बीच किस पार्टी के प्रति समर्थन बढ़ रहा है और हाल के आंदोलनों का राजनीतिक असर कितना है। अब सभी की नजरें 30 जुलाई को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। चुनाव परिणाम यह संकेत दे सकते हैं कि बिहार की राजनीति में आगे किस दिशा में बदलाव देखने को मिल सकता है।