Bihar Intermediate exam: बिहार बोर्ड इंटर प्रायोगिक परीक्षा पर सवाल! होम सेंटर में खुलेआम नंबर का सौदा, जानें 30 अंक हासिल करने के लिए कितने रुपये की लगती है बोली

Bihar Intermediate exam: बिहार बोर्ड की इंटर प्रायोगिक परीक्षा में अवैध वसूली का खुलासा हुआ है। निजी इंटर कॉलेज में अनुपस्थित छात्रों को पैसे लेकर अंक देने का स्टिंग ऑपरेशन सामने आया है।

इंटर प्रैक्टिकल परीक्षा में अवैध वसूली- फोटो : social media

Bihar Intermediate exam:  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के माध्यम से फरवरी में आयोजित होने वाली इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा से पहले ली जा रही प्रायोगिक परीक्षाएं अब विवादों के घेरे में आ गई हैं। 10 जनवरी से 20 जनवरी तक चल रही इन परीक्षाओं का आयोजन होम सेंटर पर किया जा रहा है, यानी छात्र जिस प्लस टू स्कूल या इंटर कॉलेज में नामांकित हैं, वहीं उनकी प्रायोगिक परीक्षा हो रही है।

इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कई विद्यालयों और विशेष रूप से मान्यता प्राप्त निजी इंटर कॉलेजों में अवैध वसूली और अंक के खुलेआम सौदे का गंभीर मामला सामने आया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि परीक्षा की पवित्रता और औचित्य दोनों पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

होम सेंटर व्यवस्था बनी भ्रष्टाचार की जड़

बिहार बोर्ड ने छात्रों की सुविधा के लिए प्रायोगिक परीक्षा को होम सेंटर पर कराने का निर्णय लिया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कई स्कूलों और इंटर कॉलेजों में विद्यार्थियों से मनमाफिक अंक दिलाने के नाम पर पैसे की मांग, प्रैक्टिकल कॉपी जांच में ढील और उपस्थिति को लेकर खेल खुलेआम किया जा रहा है।  स्थिति यह है कि कुछ कॉलेजों में छात्रों को यह तक कह दिया जा रहा है कि यदि वे पूरी परीक्षा में उपस्थित नहीं भी हो सकें, तो पैसे देकर काम चलाया जा सकता है। इससे मेहनती और ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय हो रहा है।

अनुपस्थित छात्र को 1000 रुपये में 30 नंबर

इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए मीडिया टीम ने शनिवार को जिला मुख्यालय स्थित लक्ष्मी साइंस कॉलेज में स्टिंग ऑपरेशन किया। मीडिया टीम ने कॉलेज के लिपिक रियाजुल से साफ तौर पर कहा कि संबंधित छात्र लखनऊ में है और परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता। इस पर लिपिक ने पहले विषय पूछा भौतिकी,रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान।  विषय जानने के बाद लिपिक ने बेझिझक कहा कि एक हजार रुपये दीजिए, तीस नंबर दे दूंगा।”

प्राचार्य का बचाव और गोलमोल जवाब

जब इस गंभीर मामले पर कॉलेज के प्राचार्य सुभाष चौधरी से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे हल्के में लेने की कोशिश की। प्राचार्य ने कहा कि कोई मुस्लिम विद्यार्थी होगा, इसलिए लिपिक ने मजाक में ऐसा कह दिया होगा। हालांकि, जब जागरण प्रतिनिधि ने स्पष्ट रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग की बात कही, तो प्राचार्य का रुख बदल गया। वे बात को इधर-उधर घुमाने लगे और बोले मैं खुद आकर मामले को शॉट आउट कर दूंगा।”