सिस्टम की सुस्ती का 'सरकारी' सबूत! सचिव कुमार रवि ने अपने ही विभाग की खोली पोल; जांच टीमें घर बैठे मना रही हैं छुट्टियां
बिहार में सरकारी निर्माणों की गुणवत्ता पर खुद विभाग के सचिव ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सचिव कुमार रवि के एक पत्र ने विभाग में मचे 'सुस्ती' के खेल का पर्दाफाश कर दिया है।
Patna - बिहार में चल रही अरबों की सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता भगवान भरोसे है, और यह दावा किसी विपक्ष ने नहीं बल्कि खुद विभाग के कद्दावर सचिव कुमार रवि ने किया है。 सचिव द्वारा मुख्य अभियंता को लिखे गए एक पत्र ने नीतीश सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की हवा निकाल दी है。 पत्र में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि विभाग द्वारा पंचायत सरकार भवन से लेकर कई बड़ी योजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है, लेकिन उनकी गुणवत्ता की जांच करने वाला कोई नहीं है。
हवा-हवाई साबित हुए 'उड़नदस्ता दल'
सचिव कुमार रवि ने पत्र में बेहद गंभीर खुलाशा किया है कि निर्माण कार्य की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग के पास 3 निदेशक (गुणवत्ता अनुश्रवण) और 10 'उड़नदस्ता दल' (फलाइंग स्क्वाड) कार्यरत हैं。 लेकिन हैरानी की बात यह है कि ये टीमें स्थल भ्रमण (Field Visit) कर रही ही नहीं हैं。 यानी जिन टीमों को भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण रोकने के लिए तैनात किया गया था, वे फाइलों में तो सक्रिय हैं लेकिन जमीन पर उनकी मौजूदगी शून्य है。
सचिव की नाराजगी: बिना अनुश्रवण गुणवत्ता असंभव
कुमार रवि ने इस स्थिति को 'अत्यंत गंभीर विषय' करार दिया है。 उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि सतत अनुश्रवण (Continuous Monitoring) के बिना योजनाओं के निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना संभव ही नहीं है。 सचिव की यह टिप्पणी दर्शाती है कि विभाग के भीतर नीचे से ऊपर तक किस कदर की लापरवाही और मिलीभगत चल रही है, जहाँ जांच अधिकारियों को फील्ड में जाने तक की फुर्सत नहीं है。
24 घंटे के भीतर मांगी गई रिपोर्ट
विभाग की फजीहत होते देख सचिव ने अब कड़ा रुख अख्तियार किया है。 उन्होंने मुख्य अभियंता को निर्देश दिया है कि अधोहस्ताक्षरी (सचिव) से विमर्श कर सभी निदेशक और उड़नदस्ता दल का भ्रमण कार्यक्रम तुरंत तय किया जाए。 साथ ही, उन्होंने एक नई डेडलाइन सेट की है जिसके तहत जांच के उपरांत 24 घंटे के भीतर जांच प्रतिवेदन (Inspection Report) उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया गया है。
भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही अधिकारियों की लापरवाही
सरकारी सचिव का यह पत्र न केवल लापरवाही का दस्तावेज है, बल्कि यह योजनाओं में होने वाली बंदरबांट की आशंका को भी बल देता है。 जब जांच टीमें योजनाओं के स्थल पर जाएंगी ही नहीं, तो ठेकेदारों को मनमानी करने और घटिया सामग्री इस्तेमाल करने की खुली छूट मिलना लाजमी है。 अब देखना यह है कि सचिव की इस फटकार के बाद विभाग के 'सुस्त' अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलते हैं या फिर यह पत्र भी महज एक रस्म बनकर रह जाएगा。