Bihar IAS Transfer: सात मंत्रियों के बदले आप्त सचिव, बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सीएम सम्राट चौधरी के आप्त सचिव बने रणजीत कुमार, नई तैनाती से सत्ता गलियारों में हलचल!

Bihar IAS Transfer: प्रशासनिक फेरबदल के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ-साथ सात मंत्रियों के कार्यालयों में भी नए आप्त सचिव और निजी सचिव की तैनाती की गई है।...

बिहार प्रशासनिक सेवा में बड़ा फेरबदल- फोटो : social Media

Bihar IAS Transfer: बिहार की नौकरशाही में एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला देखने को मिला है। सत्ता के गलियारों में जारी नई तैनातियों ने राजनीतिक और ब्यूरोक्रेसी दोनों स्तर पर सरगर्मी बढ़ा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां तय कर दी हैं।

सबसे अहम बदलाव मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यालय में हुआ है, जहां बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रणजीत कुमार को नया आप्त सचिव नियुक्त किया गया है। यह तैनाती मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रशासनिक कार्यों की गति और समन्वय को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके साथ ही सात मंत्रियों के कार्यालयों में भी नए आप्त सचिवों की नियुक्ति की गई है, जिससे पूरे प्रशासनिक ढांचे में हलचल तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग की इस अधिसूचना के बाद सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

मंत्रिमंडल में लखेंद्र कुमार रौशन के साथ विनोद कुमार पंकज को आप्त सचिव के रूप में तैनात किया गया है। वहीं सुनील कुमार के कार्यालय में मो. इश्तेयाक अजमल की नियुक्ति की गई है, जिससे उनके विभागीय कामकाज में नई ऊर्जा और गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग की मंत्री डॉ श्वेता गुप्ता के साथ सुधांशु शेखर को आप्त सचिव बनाया गया है। वहीं वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी के साथ संजीव कुमार की तैनाती की गई है, जिसे प्रशासनिक अनुभव और समन्वय की दृष्टि से अहम कदम माना जा रहा है।

पर्यटन विभाग में भी बदलाव किया गया है, जहां मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता के निजी सचिव (PS) के रूप में मनीष शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि पर्यटन क्षेत्र में योजनाओं के क्रियान्वयन और फाइलों की रफ्तार अब और तेज होगी।

यह पूरी प्रशासनिक कवायद इस बात का संकेत देती है कि सरकार अब विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना चाहती है। सत्ता के भीतर यह फेरबदल सिर्फ एक नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि कामकाज में तेजी और निगरानी को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सभी नव-नियुक्त अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे बिना किसी विलंब के अपने-अपने पदों पर योगदान दें और विभागीय कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाएं।

राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को साइलेंट रिफॉर्म के तौर पर देखा जा रहा है, जहां बिना किसी बड़े राजनीतिक विवाद के प्रशासनिक मशीनरी को नया स्वरूप दिया जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे सत्ता के भीतर बढ़ते नियंत्रण और केंद्रीकरण की रणनीति के रूप में भी देख रहा है। यह प्रशासनिक फेरबदल बिहार की नौकरशाही में नई गति, नई जिम्मेदारी और नए समीकरणों की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में सरकार की कार्यशैली में साफ तौर पर नजर आ सकता है।

रिपोर्ट- नरोत्तम कुमार सिंह