बिहार कैबिनेट विस्तार: जातिगत समीकरणों के साथ यूपी चुनाव साधने की तैयारी, मेगा इवेंट में शामिल होंगे पीएम मोदी

Bihar Politics : बिहार की नई सम्राट सरकार मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में खुद पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शिरकत करने वाले है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन है...

Patna : बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से सत्ता की चाबी रहे हैं और बिहार की नई सम्राट सरकार के आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में भी इसकी स्पष्ट छाप दिखाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विस्तार केवल मंत्रियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन है। इस शपथ ग्रहण समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शिरकत कर रहे हैं, जो इसे राज्य स्तरीय कार्यक्रम से बढ़ाकर एक राष्ट्रीय स्तर का 'मेगा इवेंट' बना रहा है।


वरिष्ठ पत्रकार इंद्र भूषण कुमार का कहना है कि बिहार में हो रहे इस पूरे विस्तार का सीधा तार उत्तर प्रदेश की भविष्य की राजनीति से जुड़ा हुआ है। उनके विश्लेषण के अनुसार, लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के भीतर समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन में कुशवाहा और कुर्मी समाज के नेताओं ने बड़ी जीत दर्ज की थी। अब भाजपा उसी 'नॉन-यादव ओबीसी' समीकरण को अपने पाले में लाने के लिए बिहार से एक बड़ा संदेश दे रही है। बिहार में किए जा रहे ये बदलाव यूपी के वोट बैंक को प्रभावित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं।


इस समीकरण को मजबूती देने के लिए सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री (या शीर्ष नेतृत्व में बड़ी भूमिका) दिए जाने को एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। पत्रकार इंद्र भूषण कुमार का दावा है कि इस फैसले से भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका पूरा फोकस कुशवाहा और कुर्मी वोट बैंक पर है। इसके जरिए पार्टी न केवल बिहार में अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है, बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी विपक्षी दलों के जातीय समीकरणों को ध्वस्त करने की तैयारी में है।


वहीं, इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दलों के प्रति भाजपा का रुख भी चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा राज्य में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रभाव को सीमित रखने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों की मानें तो एनडीए के अन्य छोटे सहयोगी दलों को केवल एक-एक विभाग देकर संतुष्ट करने की कोशिश की जा रही है, ताकि सत्ता और निर्णय लेने की मुख्य शक्ति का केंद्र पूरी तरह से भाजपा के पास ही सुरक्षित रहे।


कुल मिलाकर, यह मंत्रिमंडल विस्तार पदों के सामान्य बंटवारे से कहीं अधिक आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए एक व्यापक सियासी बिसात है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की उपस्थिति यह साफ करती है कि बिहार अब भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति का मुख्य केंद्र बन चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शपथ लेने वाले नए चेहरे किस तरह से पार्टी के इस जटिल 'जातीय गणित' को धरातल पर सफल बनाते हैं और इससे राज्य की राजनीति क्या नया मोड़ लेती है।

वंदना की रिपोर्ट