Bihar Transport News: नए साल में बिहार में बदल गया ट्रांसपोर्ट का नियम, अब इस तरह मिलेगा वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र, परिवहन विभाग ने जारी किया आदेश
Bihar Transport News: नए साल की पहली तारीख से ही सड़क और सियासत दोनों पर बड़ा बदलाव दस्तक दे चुका है। ...
Bihar Transport News: नए साल की पहली तारीख से ही सड़क और सियासत दोनों पर बड़ा बदलाव दस्तक दे चुका है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज (मॉर्थ) ने गाड़ियों के फिटनेस सिस्टम को लेकर ऐसा निर्देश जारी किया है, जिसने परिवहन महकमे से लेकर वाहन मालिकों तक हलचल मचा दी है। अब गाड़ियों का ऑफलाइन फिटनेस इतिहास बनने जा रहा है। पहली जनवरी से वाहन फिटनेस सिर्फ और सिर्फ ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन यानी एटीएस के जरिए ही जारी होगा।
मॉर्थ के अंडर सेक्रेट्री मृत्युंजय कुमार की ओर से जारी गाइडलाइन के मुताबिक बिहार के 20 जिलों को चार जिलों में स्थित एटीएस से टैग किया गया है। पटना एटीएस से सात जिले, वैशाली से तीन, रोहतास से पांच और नालंदा एटीएस से पांच जिलों को जोड़ा गया है। साफ संदेश है अब फिटनेस में मानवीय दखल नहीं, सिर्फ मशीनों का फैसला चलेगा।
पटना एटीएस से भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय और लखीसराय को जोड़ा गया है। वैशाली एटीएस से मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और छपरा को टैग किया गया है। रोहतास एटीएस से कैमूर (भभुआ), औरंगाबाद, अरवल, भोजपुर और बक्सर जुड़े हैं। वहीं नालंदा एटीएस से नवादा, गया, शेखपुरा, जहानाबाद और लखीसराय जिले अटैच किए गए हैं।
सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है सड़कों से अनफिट गाड़ियों की विदाई और सड़क हादसों पर लगाम। एटीएस को अगर आसान जुबान में समझें तो यह गाड़ियों का सिटी स्कैन है। जैसे मशीनें इंसान के अंदरूनी हालात बताती हैं, वैसे ही एटीएस बिना किसी अफसर या बिचौलिए के गाड़ी की सड़क-योग्यता पर फैसला सुनाता है। ब्रेक, सस्पेंशन, लाइट, स्पीडोमीटर, साइड स्लिप, ध्वनि और उत्सर्जन हर कसौटी मशीन तय करती है।
हालांकि बिहार में फिलहाल तस्वीर थोड़ी मुअल्लक है। मॉर्थ के निर्देश के बावजूद परिवहन मुख्यालय पटना से अभी औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में अभी फिटनेस जांच भौतिक रूप से हो रही है। लेकिन इतना तय है कि जैसे ही मुख्यालय से आदेश आएगा, पूरा सिस्टम ऑनलाइन ट्रैक पर दौड़ने लगेगा।
सरकार का दावा है कि जिन जिलों में एटीएस नहीं है, वहां जल्द इसकी स्थापना होगी। मतलब साफ है फिटनेस अब सिफारिश नहीं, सिस्टम से मिलेगी। सड़क पर वही गाड़ी चलेगी, जो मशीन की नजर में फिट होगी। बिहार की सड़कों पर अब टेक्नोलॉजी का पहरा और नियमों की हुकूमत तय मानी जा रही है।