कांग्रेस में रार! मनरेगा बचाने चले थे राजेश राम, लेकिन अपनी ही बैठक से 'गायब' हो गए पार्टी के 5 में से 3 विधायक
मनरेगा का नाम बदलने या खत्म करने की केंद्र सरकार की कथित कोशिशों के खिलाफ बिहार कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। सदाकत आश्रम में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अध्यक्षता में बड़ी बैठक बुलाई गई, लेकिन पार्टी के विधायकों की कम उपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर
Patna - पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय, सदाकत आश्रम में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के नाम को खत्म करने की कोशिशों के खिलाफ रणनीति तैयार करना था। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सांसद, पूर्व उम्मीदवार और जिला अध्यक्षों को बुलाया गया था ताकि आगामी आंदोलनों की रूपरेखा तय की जा सके।
बैठक में 'शक्ति प्रदर्शन' पड़ा फीका, 5 में से सिर्फ 2 विधायक पहुंचे
कांग्रेस ने इस बैठक के लिए अपने सभी विधायकों और सांसदों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया था। हालांकि, जब बैठक शुरू हुई तो नजारा कुछ और ही था। पार्टी के कुल 5 विधायकों (क्षेत्रीय संदर्भ में) में से केवल 2 विधायक ही बैठक में शामिल हुए, जबकि 3 प्रमुख विधायक अनुपस्थित रहे। विधायकों की इस कम उपस्थिति ने संगठन के भीतर समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है।
प्रदेश अध्यक्ष का 'गोल-मोल' जवाब: "क्षेत्र में काम कर रहे हैं विधायक"
विधायकों की अनुपस्थिति पर जब प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्थिति को संभालते हुए बचाव किया। उन्होंने सीधा जवाब देने के बजाय गोल-मोल लहजे में कहा कि जो विधायक नहीं आ पाए हैं, वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी के कार्यों में व्यस्त हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अहम बैठक से विधायकों का दूरी बनाना पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक न होने का संकेत है।
10 जनवरी से शुरू होगा राज्यव्यापी आंदोलन
बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस मनरेगा के मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। पार्टी ने एक बड़े आंदोलन का कैलेंडर जारी किया है। इसके तहत 10 जनवरी से 25 फरवरी तक बिहार के सभी पंचायतों से लेकर प्रदेश स्तर तक चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। कांग्रेस का लक्ष्य इस मुद्दे को सीधे ग्रामीण जनता तक ले जाना है।
पंचायत से प्रदेश स्तर तक दिखेगा कांग्रेस का दम
कांग्रेस के इस अभियान के तहत हर पंचायत में जनसंपर्क किया जाएगा। सभी जिलाध्यक्षों और प्रकोष्ठ के अध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें। पार्टी का मानना है कि मनरेगा ग्रामीण भारत की लाइफलाइन है और इसके नाम या स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चुनाव उम्मीदवारों और पदाधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी
बैठक में विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके सभी उम्मीदवारों को भी शामिल रहने को कहा गया था। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि ये नेता अपने क्षेत्रों में धरने का नेतृत्व करें। भले ही बैठक में विधायकों की संख्या कम रही हो, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया है कि 10 जनवरी से होने वाला आंदोलन बेहद सफल रहेगा और सरकार को अपना फैसला बदलना होगा।
Report - Narrottam kumar