Bihar Education Reform: शिक्षा का पूरा सिस्टम बदलने की तैयारी,बिहार सरकार के ये बड़े फैसले बदलेंगे एजुकेशन डिपार्टमेंट का चेहरा,पढ़िए सम्राट सरकार का रोड मैप

Bihar Education Reform: बिहार में सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ाने के तौर पर पेश कर रही है।

Bihar Education Reform: बिहार में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की ओर से कई बड़े फैसले किए गए हैं। परीक्षा में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक और फर्जी अभ्यर्थियों पर अंकुश लगाने से लेकर उच्च शिक्षा के विस्तार, शिक्षक प्रशिक्षण, छात्र ऋण और शोध को बढ़ावा देने तक कई योजनाओं पर काम चल रहा है। हालांकि, इन पहलों के साथ उनके क्रियान्वयन, संसाधनों और वास्तविक असर को लेकर सवाल और राजनीतिक बहस भी जारी है।

परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए बिहार सरकार ने पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की है। पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हरीश कुमार को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। समिति को राज्य की विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की व्यवस्था की समीक्षा कर सुधार के सुझाव देने हैं। रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सौंपे जाने का प्रावधान है।समिति के दायरे में बीपीएससी के साथ अन्य परीक्षा बोर्ड, आयोग, विश्वविद्यालय और भर्ती एजेंसियां भी आएंगी। परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, संस्थागत ढांचा, जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों को रोकने के उपायों पर भी सुझाव दिए जाने हैं।

बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर 19 अगस्त के आदेश के बाद शिक्षा ऋण की व्यवस्था में बदलाव हुआ था। इसके तहत बीएसईएफसी के जरिए 2 लाख रुपये तक और बाकी राशि बैंकों से उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई थी। बाद में सरकार ने यह आदेश रद्द कर दिया और पहले की तरह बीएसईएफसी के माध्यम से 4 लाख रुपये तक शिक्षा ऋण देने की व्यवस्था बहाल कर दी।इस फैसले से उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ऋण लेने की प्रक्रिया पहले वाली व्यवस्था के अनुरूप हो गई।

उच्च शिक्षा के विस्तार के तहत बिहार में 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेज शुरू किए गए हैं। इन कॉलेजों के लिए 2,451 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की गई है। सरकार की ओर से कहा गया है कि नए कॉलेजों से विद्यार्थियों को अपने आसपास उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा।इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने 100 प्राध्यापकों को ऑक्सफोर्ड और अन्य प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाने की योजना की घोषणा की है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और वैश्विक अकादमिक तौर-तरीकों से परिचित कराना बताया गया है।

शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य में एक अलग शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की गई। प्रस्तावित विश्वविद्यालय का फोकस राज्य के करीब 7 लाख शिक्षकों के प्रशिक्षण, क्षमता विकास और आधुनिक शिक्षण तकनीकों पर होगा।

शिक्षक स्थानांतरण की नई व्यवस्था में ऑनलाइन आवेदन और विकल्प आधारित प्रक्रिया अपनाई गई है। अगस्त में शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हजारों सरप्लस शिक्षकों ने तबादले के लिए आवेदन किया था। सितंबर में 26 जिलों के करीब 42 हजार सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की रिपोर्ट सामने आई। उच्च शिक्षा में शोध को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप भी लाई गई है। इसके तहत करीब 1,000 छात्राओं को चार वर्षों तक हर महीने 10 हजार रुपये की सहायता देने की योजना है।

बिहार में महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा भी की गई है। प्रस्तावित संस्थान का उद्देश्य महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना है।वहीं शिक्षक भर्ती के मोर्चे पर बीपीएससी ने TRE-4 के तहत 32,388 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 25 सितंबर 2026 से शुरू की है। आवेदन की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर बताई गई है।

लाइब्रेरियन भर्ती की मांग के बीच संबंधित भर्ती प्रक्रिया के लिए अधिसूचना जारी होने की बात भी सामने आई है। इस तरह परीक्षा सुधार से लेकर भर्ती, कॉलेज विस्तार, शिक्षक प्रशिक्षण और शोध तक शिक्षा व्यवस्था में कई मोर्चों पर एक साथ बदलाव की कवायद चल रही है।

सरकार इन कदमों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ाने के तौर पर पेश कर रही है। दूसरी ओर, विपक्ष और अन्य आलोचक नए कॉलेजों में उपलब्ध संसाधनों, बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में इन फैसलों का वास्तविक असर आने वाले समय में इनके अमल और निगरानी से तय होगा।