Bihar Heatwave:सूखे की आहट से डरा बिहार,सुपर अल-नीनो से बिगड़ सकता है मानसून का चाल

Bihar Heatwave: बिहार इन दिनों भीषण गर्मी की ऐसी मार झेल रहा है, जहां पारा लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है और आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है।

सूखे की आहट से डरा बिहार- फोटो : X

Bihar Heatwave: बिहार इन दिनों भीषण गर्मी की ऐसी मार झेल रहा है, जहां पारा लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है और आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद बेहद कम नजर आ रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सीजन लगभग 30 दिन तक हीटवेव यानी लू का प्रकोप रह सकता है, जिससे आम जनजीवन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

चिंता की बात यह भी है कि इस बार बिहार में सूखे जैसे हालात बनने का खतरा मंडरा रहा है। प्रशांत महासागर के विषुवत रेखीय क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान बढ़ रहा है, जिससे “सुपर अल-नीनो” जैसी स्थिति बनने की संभावना जताई जा रही है। यह स्थिति मिड मई से लेकर जुलाई और फिर सर्दियों तक बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ता है।अल-नीनो के दौरान प्रशांत महासागर से उठने वाली गर्म हवाएं हिंद महासागर और अरब सागर से आने वाली नम और ठंडी हवाओं को कमजोर कर देती हैं। यही नम हवाएं भारत में मानसूनी बारिश लाती हैं। जब इन हवाओं का प्रवाह बाधित होता है, तो बारिश की मात्रा घट जाती है और सूखे जैसे हालात बनने लगते हैं।

मौसम विभाग के अनुसार बिहार में मानसून 8 से 10 जून के बीच दस्तक दे सकता है, जबकि सामान्य तौर पर यह 15 जून के आसपास आता है। वहीं केरल में मानसून 26 मई तक पहुंचने की संभावना है। लेकिन इस बार वैज्ञानिकों ने संकेत दिए हैं कि बिहार में सामान्य से करीब 20% कम बारिश हो सकती है। राज्य की औसत मानसूनी वर्षा 992.2 मिमी मानी जाती है, जो इस बार प्रभावित हो सकती है।

यदि सुपर अल-नीनो मजबूत रहा, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसका असर फसलों, जलस्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। फिलहाल पटना समेत कई जिलों में 29 मई तक तापमान 40°C से ऊपर रहने का अनुमान है, जबकि 27 मई को पारा 45°C तक पहुंच सकता है। गया और रोहतास जैसे जिलों में भी भीषण गर्मी का कहर जारी रहेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु चक्र है, जो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में उत्पन्न होता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यापारिक हवाएं गर्म पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, लेकिन जब यह व्यवस्था कमजोर पड़ती है तो गर्म पानी पूर्व की ओर बढ़ता है और मौसम प्रणाली बिगड़ जाती है।

यदि “सुपर अल-नीनो की स्थिति बनती है (जब समुद्री तापमान औसत से 2°C या अधिक बढ़ जाता है), तो यह दुर्लभ और अत्यंत प्रभावी जलवायु घटना मानी जाती है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न को गहराई से प्रभावित करती है।

इसी के साथ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि भारतीय मानसून की जड़ें करोड़ों साल पुराने भूगर्भीय बदलावों से जुड़ी हैं। थार मरुस्थल के गर्म होने से लो-प्रेशर सिस्टम बनता है, जिससे समुद्र से ठंडी और नम हवाएं जमीन की ओर खिंचती हैं और हिमालय से टकराकर बारिश कराती हैं। लेकिन जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो मानसून कमजोर पड़ जाता है और बारिश कम हो जाती है।कुल मिलाकर, बिहार इस समय भीषण गर्मी और संभावित कम बारिश के दोहरे खतरे के बीच खड़ा है, जो आने वाले महीनों में बड़ी चुनौती बन सकता है।