Bihar Heat Stroke: तापमान बढ़ते ही बढ़ रहा मेंटल स्ट्रेस और मूड स्विंग का खतरा,शरीर ही नहीं, ब्रेन और इमोशंस भी हो रहे प्रभावित, ऐसे करें बचाव
Bihar Heat Stroke: बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में बढ़ते तापमान का असर अब सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) पर भी गहरा असर डाल रहा है।
Bihar Heat Stroke: बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में बढ़ते तापमान का असर अब सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) पर भी गहरा असर डाल रहा है। तेज़ धूप, हीट वेव और लगातार हाई टेम्परेचर के कारण लोग थकान, चिड़चिड़ापन, बेचैनी और नींद की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई मामलों में काम पर फोकस कम होना, बिना वजह गुस्सा आना और मानसिक असंतुलन भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तापमान बहुत अधिक होता है तो शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इससे थकान तेजी से बढ़ती है और व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगता है। डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी, इस समस्या को और गंभीर बना देती है। इससे दिमाग तक ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो प्रभावित होता है, जिससे फोकस, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
गर्मी के दौरान हीट स्ट्रोक एक गंभीर स्थिति बन सकती है, खासकर जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए। ऐसे में पसीना आना बंद हो जाना, सांस लेने में कठिनाई, चक्कर, तेज सिरदर्द, उल्टी, अत्यधिक कमजोरी और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक धूप से बचना चाहिए। हल्के, ढीले और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने चाहिए। काले रंग की बजाय सफेद छतरी और कपड़ों का उपयोग बेहतर माना जाता है क्योंकि यह कम गर्मी सोखते हैं। सिर को गीले या हल्के कपड़े से ढकना भी राहत देता है।
मेंटल हेल्थ विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लगभग 8% तक बढ़ोतरी देखी जाती है। इसका मुख्य कारण डिहाइड्रेशन, खराब नींद, और दिनचर्या में बदलाव है। शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से ब्रेन फंक्शन प्रभावित होता है, जिससे मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।लगातार गर्मी के कारण सर्केडियन रिद्म (नींद-जागने का प्राकृतिक चक्र) भी बिगड़ जाता है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है। यही कारण है कि लोग दिनभर सुस्ती, लो एनर्जी और मानसिक थकान महसूस करते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस मौसम में पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेना बेहद जरूरी है। ताजे फल, सलाद और हल्का भोजन शरीर और दिमाग दोनों को संतुलित रखते हैं। सुबह या शाम के समय हल्की वॉक, डीप ब्रीदिंग और नियमित रूटीन मानसिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।इसके अलावा कैफीन और शुगर ड्रिंक का ज्यादा सेवन, देर रात तक मोबाइल-स्क्रीन का उपयोग और जंक फूड मानसिक असंतुलन को और बढ़ा सकते हैं। लगातार हीट एक्सपोजर से ब्रेन पर स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसे लक्षण भी ट्रिगर हो सकते हैं।कुल मिलाकर, गर्मी अब सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।