Samrat vote of confidence:बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट शुरू,सदन में सियासी घमासान, तेजस्वी-सम्राट आमने-सामने, सिलेक्टेड सीएम बनाम इलेक्टेड सीएम पर सदन बना रणभूमि

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की अध्यक्षता में बुलाए गए इस एक दिवसीय विशेष सत्र में सदन का माहौल उस वक्त गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला।...

सिलेक्टेड सीएम बनाम इलेक्टेड सीएम पर सदन बना रणभूमि- फोटो : Bihar Vidhan sabha

Samrat vote of confidence:बिहार की राजनीति आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई जब सम्राट चौधरी ने विधानसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया। 15 अप्रैल 2026 को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद आज वे सदन में अपनी सरकार का बहुमत साबित करने उतरे हैं। यह पहली बार है जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री के रूप में सदन का नेतृत्व कर रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की अध्यक्षता में बुलाए गए इस एक दिवसीय विशेष सत्र में एनडीए खेमे में जबरदस्त आत्मविश्वास और उत्साह देखा गया। सत्ता पक्ष के पास 201 विधायकों का मजबूत समर्थन है, जो 243 सदस्यीय सदन में स्पष्ट और मजबूत बहुमत का संकेत देता है।

लेकिन सदन का माहौल उस वक्त गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा ने नीतीश कुमार को राजनीतिक रूप से साइडलाइन कर दिया है और अब एक इलेक्टेड सीएम की जगह सिलेक्टेड सीएम ने सत्ता संभाली है। सत्ता पक्ष की टोका-टाकी से नाराज होकर वे कुछ देर के लिए सीट पर बैठ गए, लेकिन बाद में स्पीकर के मनाने पर फिर से भाषण दिया।

तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार में ओरिजिनल बीजेपी का कोई बड़ा चेहरा मौजूद नहीं है और कई नेता दूसरे दलों से आए हुए हैं, जिससे भाजपा के अंदर ही असंतोष की स्थिति बन रही है। वहीं भाकपा-माले के विधायक संदीप सौरभ ने इसे जनता के साथ विश्वासघात करार दिया और कहा कि चुनावी वादों के उलट राजनीति की दिशा बदल दी गई है।

इस पूरे सियासी संग्राम में एक और दिलचस्प चर्चा यह भी है कि सदन में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव लाया जा सकता है, जिससे उनके लंबे राजनीतिक सफर को औपचारिक सम्मान देने की बात सामने आ रही है।

सूत्रों के अनुसार, फ्लोर टेस्ट से पहले विपक्ष बॉयकॉट की रणनीति पर भी विचार कर सकता है, जिससे सदन की कार्यवाही और अधिक सियासी तनाव में बदल सकती है।

कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा का यह सत्र सिर्फ एक फ्लोर टेस्ट नहीं बल्कि सत्ता, रणनीति और सियासी संदेशों की एक बड़ी लड़ाई बन चुका है जहां हर बयान आने वाले राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय कर सकता है।