निवेश के नाम पर 'कागजी खेल' खत्म: नीतीश सरकार ने रद्द किए 1426 करोड़ के प्रोजेक्ट्स, सुस्त निवेशकों पर गिरी गाज!
बिहार की नीतीश सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र में सुस्ती दिखाने वाले निवेशकों पर बड़ा एक्शन लिया है। उद्योग विभाग ने मानकों पर खरे न उतरने वाले 1426 करोड़ रुपये के 48 निवेश प्रस्तावों को पहले ही चरण में रद्द कर दिया है।
Patna - बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने की कोशिशों के बीच नीतीश सरकार ने एक कड़ा फैसला लिया है। उद्योग विभाग ने राज्य में निवेश के नाम पर खानापूर्ति करने वाले 48 प्रस्तावों को 'स्टेज-1' क्लीयरेंस के दौरान ही नामंजूर कर दिया है। पिछले दिनों राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) की बैठक में गहन मंथन के बाद इन प्रस्तावों को खारिज करने का निर्णय लिया गया। सरकार के इस कदम से उन निवेशकों को साफ संदेश गया है जो प्रस्ताव देकर काम आगे नहीं बढ़ा रहे थे।
मानकों पर खरे नहीं उतरे प्रोजेक्ट्स
उद्योग विभाग के अनुसार, रद्द किए गए ये सभी प्रस्ताव सरकार के निर्धारित मापदंडों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से सर्वाधिक 42 प्रस्ताव ऐसे थे जो विभाग द्वारा मांगी गई आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे थे। बार-बार नोटिस और पृच्छा के बावजूद ये प्रोजेक्ट्स निष्क्रिय पड़े थे। इसके अलावा, दो निवेशक 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2016' की अर्हता पूरी नहीं कर सके, जबकि चार निवेशकों ने स्वयं ही अपने कदम पीछे खींचते हुए प्रस्ताव वापस लेने का अनुरोध किया था।
खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर को सबसे बड़ा झटका
रद्द किए गए कुल 1426 करोड़ रुपये के निवेश में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 'खाद्य प्रसंस्करण' (Food Processing) सेक्टर की है। इस अकेले सेक्टर से 1241 करोड़ रुपये के 27 प्रस्ताव खारिज किए गए हैं। इसके अलावा मैन्यूफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, प्लास्टिक, सौर ऊर्जा और टेक्सटाइल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रस्तावों को भी तकनीकी कारणों और लापरवाही के चलते रद्द कर दिया गया है। सरकार अब केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही है जो धरातल पर उतरने के लिए तैयार हैं।
उद्योग मंत्री की दोटूक: केवल पात्र को मिलेगी सुविधा
बिहार के उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि निवेश प्रस्ताव देकर भूल जाने वाले उद्यमियों की अब गहन समीक्षा की जा रही है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो प्रोजेक्ट्स केवल कागजों तक सीमित हैं, उन्हें रद्द किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जो पात्र निवेशक नियमों का पालन कर रहे हैं और वास्तव में बिहार में उद्योग लगाना चाहते हैं, उन्हें सरकार की ओर से हर संभव सुविधा और प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सेक्टर-वार रद्द हुए निवेश का ब्योरा
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, रद्द किए गए निवेश की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
| सेक्टर | प्रस्तावों की संख्या | राशि (करोड़ में) |
| खाद्य प्रसंस्करण | 27 | 1241 |
| अपारंपरिक ऊर्जा (सौर ऊर्जा) | 02 | 49 |
| प्लास्टिक व रबड़ | 07 | 33 |
| मैन्यूफैक्चरिंग | 05 | 30 |
| हेल्थकेयर | 03 | 26 |
| टेक्सटाइल, चर्म व लकड़ी | 02 | ~7 |