सृजन घोटाले के 'खलनायक' पर नीतीश सरकार का महा-प्रहार: पूर्व BDO की 100% पेंशन जब्त, अब पाई-पाई को मोहताज

बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का कड़ा संदेश देते हुए करोड़ों के सृजन घोटाले में शामिल पूर्व BDO चंद्रशेखर झा की पूरी पेंशन रोकने का अंतिम फैसला सुनाया है।

Patna - : बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एक सेवानिवृत्त अधिकारी पर अब तक की सबसे बड़ी गाज गिराई है। पीरपैंती (भागलपुर) के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चंद्रशेखर झा की 100% पेंशन को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। करोड़ों रुपये के सृजन घोटाले और पद के दुरुपयोग के आरोपी इस अधिकारी की पुनर्विचार याचिका को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। 

सृजन घोटाले के पैसों से पत्नी के नाम अय्याशी 

बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी चंद्रशेखर झा (सेवानिवृत्त) पर पीरपैंती, भागलपुर में पदस्थापन के दौरान 4,52,88,246 रुपये की सरकारी राशि की अवैध निकासी और उसे 'सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड' के खातों में ट्रांसफर करने का गंभीर आरोप है । CBI जांच में खुलासा हुआ कि इस काली कमाई से उन्होंने गाजियाबाद के वसुंधरा में अपनी पत्नी बबीता झा के नाम पर फ्लैट बुक कराया था 

नियम-139 के तहत सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक' 

सरकार ने बिहार पेंशन नियमावली, 1950 के नियम-139 के तहत अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए उनकी पेंशन में 100% कटौती का फैसला लिया है । विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सेवक के विरुद्ध कार्यरत अवधि में 'घोर कदाचार' के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो सरकार को उनकी पेंशन रोकने का पूर्ण अधिकार है । 

दोषसिद्धि का इंतजार जरूरी नहीं 

श्री झा ने अपने बचाव में दलील दी थी कि जब तक सक्षम न्यायालय से वे दोषी सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उनकी पेंशन नहीं रोकी जा सकती । हालांकि, सामान्य प्रशासन विभाग ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि CBI की रिपोर्ट और साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया गबन का आरोप प्रमाणित होता है, जो पेंशन रोकने के लिए पर्याप्त आधार है 

दागी ट्रैक रिकॉर्ड ने बिगाड़ा मामला 

अधिकारी का रिकॉर्ड पहले से ही विवादों में रहा है । इससे पहले रोहतास में जिला प्रबंधक (राज्य खाद्य निगम) के पद पर रहते हुए भी उन्हें आदेशों की अवहेलना और विभाग को आर्थिक क्षति पहुंचाने के लिए 'निन्दन' और वेतन कटौती जैसे दंड मिल चुके हैं । सरकार ने इसे उनके सेवाकाल के 'असंतोषप्रद' होने का पुख्ता प्रमाण माना है । 

पुनर्विचार याचिका पर मिली 'नो एंट्री' 

झा ने सजा के खिलाफ 19 जनवरी 2026 को पुनर्विचार याचिका दाखिल कर राहत की मांग की थी । लेकिन सरकार ने 24 फरवरी 2026 को जारी अपने नए संकल्प में साफ कर दिया कि झा ने अपने बचाव में कोई नया तथ्य या गबन न करने का कोई साक्ष्य पेश नहीं किया है । परिणामस्वरूप, उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया गया । 

भ्रष्ट तंत्र को कड़ा संदेश 

अवर सचिव उमेश प्रसाद द्वारा जारी आदेश के बाद अब चंद्रशेखर झा को एक भी पैसा पेंशन के रूप में नहीं मिलेगा । संकल्प की प्रति महालेखाकार और CBI के डीआईजी को भी भेज दी गई है ताकि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके । यह कार्रवाई बिहार के प्रशासनिक गलियारे में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नजीर बन गई है