Bihar Government Action: बिहार में प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक,14 सीओ पर गिरी गाज, सस्पेंशन और वेतन रोक से प्रशासन में हड़कंप

Bihar Government Action: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार ने राजस्व व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं के खिलाफ बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए 14 अंचलाधिकारियों (सीओ) पर शिकंजा कस दिया है। ...

14 अंचलाधिकारियों पर गिरी गाज- फोटो : reporter

Bihar Government Action: बिहार की सियासी सरज़मीं पर इन दिनों सख़्ती और सुधार की नई बयार चल रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार ने राजस्व व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं के खिलाफ बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए 14 अंचलाधिकारियों (सीओ) पर शिकंजा कस दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब भूमि सुधार विभाग लगातार पारदर्शिता और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब “काम में ढिलाई या गड़बड़ी” किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) गठित किया गया है और कई मामलों में वेतन वृद्धि पर रोक भी लगा दी गई है। विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने दो टूक कहा है कि प्रशासन में “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति जारी रहेगी और जो भी अधिकारी भ्रष्टाचार के रास्ते पर चलेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।

इस कार्रवाई की जद में कई गंभीर मामले सामने आए हैं। कहीं ऑनलाइन जमाबंदी में बिना साक्ष्य रकबा जोड़ने का आरोप है, तो कहीं गलत तरीके से दाखिल-खारिज करने की गड़बड़ी उजागर हुई है। कुछ मामलों में अपील वाद के आदेशों की अनदेखी और सरकारी जमीन को निजी नाम में दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।

सबसे चर्चित मामलों में पत्थरघट के पूर्व सीओ राकेश कुमार पर आरोप पत्र, पाटलिपुत्र के सीओ अनुज कुमार की वेतन वृद्धि पर रोक, और गुरारू के पूर्व सीओ संजीव कुमार त्रिवेदी की दो वेतन वृद्धि रोकने का निर्णय शामिल है। वहीं बैरिया, साहेबपुर कमाल और अन्य क्षेत्रों में भी अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की गई है।

इसके अलावा मुजफ्फरपुर के कांटी की तत्कालीन सीओ रिषिका को निलंबित करने की कार्रवाई को सरकार की मंजूरी मिल गई है। उन पर सरकारी जमीन को कथित रूप से गलत व्यक्ति के नाम पर दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोप लगे थे। कुल मिलाकर यह कार्रवाई बिहार प्रशासन में एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है—कि अब कुर्सी पर बैठे हर अफसर को जवाबदेही और ईमानदारी के कसौटी पर खरा उतरना ही होगा, वरना कार्रवाई तय है।

ब्यूरो रिपोर्ट